भारत के आर्थिक विकास की सराहना करने के साथ फेडरल रिजर्व अधिकारियों पर बरसे ट्रंप

भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक बताया
आर्थिक विकास की सराहना करने के साथ फेडरल रिजर्व अधिकारियों की कड़ी आलोचना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक बताया और कहा कि अमेरिका को महंगाई और ब्याज दर की चिंताओं से बंधे रहने के बजाय तेज आर्थिक विकास हासिल करना चाहिए। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के आर्थिक प्रदर्शन की तारीफ की, जबकि मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बहुत ज्यादा सावधानी बरतने को लेकर आलोचना की।राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि आपके पास कुछ देश हैं, भारत उनमें से एक है, जो बहुत अच्छा कर रहा है, लेकिन यह 7-8 फीसदी पर है। हमें ऊपर बढ़ने की इजाजत नहीं है। अगर हम ऊपर जाते हैं, तो वे इसे खत्म करना चाहते हैं। ट्रंप ने तर्क दिया कि अमेरिका को बहुत तेजी से आर्थिक विस्तार का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें 4 फीसदी पर रुकना चाहिए। हमें 12 और 13 फीसदी जीडीपी पर रहना चाहिए। ब्याज दरों पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजार इन दिनों 'महंगाई के विरोधाभास' (सिंड्रोम) से जूझ रहे हैं। यही वजह है कि अर्थव्यवस्था के अच्छे आंकड़े आने पर भी निवेशक अक्सर ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से घबरा जाते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि काश मैं इसे पुराने तरीके से बदल पाता। उन्होंने उस समय को याद किया जब मजबूत आर्थिक डेटा से आमतौर पर फाइनेंशियल मार्केट को बढ़ावा मिलता था। ट्रंप ने तर्क दिया कि आर्थिक विकास को अपने आप महंगाई बढ़ाने वाला नहीं माना जाना चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के नीति-नियंताओं की भी आलोचना की और कहा कि वे ब्याज दर को बहुत ज्यादा रखकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा करने का रिस्क उठा रहे हैं।

दस वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार बढ़े

हाल के वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक बना हुआ है, जिसकी विकास दर को घरेलू खपत, निवेश और सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च से समर्थन मिला है। मल्टीनेशनल कंपनियों के सप्लाई चेन में विविधता और चीन से आगे मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने से देश ने वैश्विक निवेश भी बढ़ाया है। पिछले दस वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार बढ़े हैं, जिसमें व्यापार, तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा में सहयोग बढ़ा है। दोनों देश अपने बड़े रणनीतिक संबंध के हिस्से के तौर पर निवेश और सप्लाई चेन साझेदारी को और गहरा करने के लिए भी काम कर रहे हैं।

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