

लंदन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चैटबॉट्स और डेटा एनालिसिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह चिकित्सा विज्ञान में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि दुनिया की पहली ऐसी वैक्सीन विकसित की गई है, जिसे पूरी तरह AI की मदद से डिजाइन किया गया है और जो किसी एक नहीं, बल्कि पूरे वायरस परिवार के खिलाफ सुरक्षा देने में सक्षम हो सकती है।
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के शोधकर्ताओं ने बायोटेक कंपनी DIOSynVax के साथ मिलकर इस तकनीक पर काम किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह वैक्सीन न केवल मौजूदा वायरस स्ट्रेन बल्कि भविष्य में उभरने वाले नए वेरिएंट्स के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
इस वैक्सीन ने शुरुआती मानव परीक्षण (फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल) सफलतापूर्वक पार कर लिया है। परीक्षण में इसे सुरक्षित पाया गया है और अब इसे 200 से अधिक स्वयंसेवकों पर बड़े स्तर पर परखा जाएगा।
अब तक की वैक्सीन किसी विशेष वायरस या उसके एक स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाई जाती रही हैं। यही कारण है कि फ्लू और कोविड-19 जैसी बीमारियों में समय-समय पर वैक्सीन अपडेट करनी पड़ती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पुराना मॉडल वायरस के “पीछे-पीछे चलने” जैसा है, जबकि नई AI आधारित तकनीक भविष्य के वायरस को पहले से पहचानने की दिशा में काम करती है। इस वैक्सीन को “यूनिवर्सल सार्बेको कोरोनावायरस वैक्सीन” नाम दिया गया है। यह केवल SARS-CoV-2 (कोविड-19 वायरस) ही नहीं, बल्कि SARS और चमगादड़ों में पाए जाने वाले अन्य संबंधित कोरोनावायरसों के खिलाफ भी काम करने की क्षमता रखती है।
परीक्षण में 18 से 50 वर्ष के स्वस्थ स्वयंसेवकों को शामिल किया गया। वैक्सीन को विशेष डीएनए-आधारित तकनीक से शरीर में पहुंचाया गया, जिसमें पारंपरिक सुई के बजाय उच्च-दबाव जेट सिस्टम का उपयोग किया गया।
परिणामों में पाया गया कि वैक्सीन ने सुरक्षित रहते हुए कई प्रकार के कोरोनावायरसों के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जिसमें कुछ संभावित भविष्य के वायरस भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि वायरस परिवार के साझा गुणों की पहचान पहले ही कर ली जाए, तो महामारी फैलने से पहले ही वैक्सीन तैयार की जा सकती है।
AI आधारित मॉडल इसी दिशा में काम कर रहा है, जहां प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पूर्व-तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।
शोधकर्ता अब इस तकनीक को बर्ड फ्लू (H5N1) और इबोला जैसे खतरनाक वायरसों पर भी लागू कर रहे हैं। उद्देश्य ऐसी वैक्सीन विकसित करना है जो पूरे वायरस परिवार को कवर कर सके।
हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन विशेषज्ञ इसे वैक्सीन विज्ञान में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। यदि आगे के ट्रायल सफल रहते हैं, तो भविष्य में महामारी से पहले ही व्यापक सुरक्षा देने वाली वैक्सीन तैयार करना संभव हो सकता है।