

राजेश, सन्मार्ग संवाददाता
खड़गपुर : लंबे विवाद और बंदी के बाद ग्रामीणों की पहल से लौटी पुरानी परंपरा, अस्थायी मंदिर बनाकर स्थापित की गई मां काली की पत्थर की प्रतिमा। पश्चिम मिदनापुर जिले के नारायणगढ़ में वर्षों से बंद पड़ी पारंपरिक काली पूजा एक बार फिर शुरू होने जा रही है। लंबे समय से चले आ रहे विवाद और आपसी खींचतान के बाद नारायणगढ़ हाट परिसर में ग्रामीणों की पहल पर मां काली की पूजा दोबारा शुरू की गई है। इसके लिए ग्रामीणों ने अस्थायी मंदिर का निर्माण कर मां काली की पत्थर की प्रतिमा स्थापित की है। पुरानी परंपरा की वापसी से स्थानीय लोगों में खुशी और उत्साह का माहौल है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, एक समय नारायणगढ़ हाट परिसर में मां काली का मंदिर हुआ करता था। क्षेत्र के लोग सामूहिक रूप से वहां पूजा का आयोजन करते थे। यह पूजा इलाके की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा थी। लेकिन बाद में हाट संचालन समिति के साथ मतभेद और विवाद के कारण पूजा बंद हो गई। इसके बाद कई वर्षों तक यहां काली पूजा का आयोजन नहीं हो सका।
ग्रामीणों का दावा है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा नेतृत्व के सहयोग से इस पारंपरिक पूजा को दोबारा शुरू करने की पहल की गई। गांव के लोगों ने एकजुट होकर अस्थायी मंदिर तैयार किया और वहां मां काली की पत्थर की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की शुरुआत की। इस संबंध में स्थानीय भाजपा नेता प्रद्युत भुइयां ने बताया कि नारायणगढ़ हाट परिसर में लंबे समय से स्थानीय निवासियों द्वारा काली पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा बंद हो गई थी। ग्रामीणों ने जब दोबारा पूजा शुरू करने के लिए उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने सर्वसम्मति से इस आयोजन में सहयोग करने का निर्णय लिया। लंबे अंतराल के बाद नारायणगढ़ हाट परिसर में फिर से काली पूजा शुरू होने की पहल को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस प्रयास से क्षेत्र की पुरानी धार्मिक परंपरा को फिर से मजबूती मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां भी इससे जुड़ सकेंगी।