

राजेश, सन्मार्ग संवाददाता
खड़गपुर : पश्चिम मिदनापुर जिले में राजनीतिक हिंसा के कारण दो परिवारों ने अपने जवान बेटों को खो दिया था। नारायणगढ़ के बेलदा स्थित सरिषा इलाके के विद्युत दास और दांतन के कुसमी इलाके के पवन जाना की मौत की घटनाओं ने उस समय पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। अब राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा के बाद दोनों परिवारों में एक बार फिर उम्मीद जगी है। हालांकि, सरकारी घोषणा से परिवारों में खुशी जरूर है, लेकिन उनका कहना है कि नौकरी और आर्थिक सहायता के साथ-साथ उन्हें न्याय भी मिलना चाहिए।
विद्युत दास के परिवार ने कहा- मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए
नारायणगढ़ के बेलदा अंतर्गत सरिषा इलाके के निवासी विद्युत दास की मौत को लेकर उस समय काफी राजनीतिक विवाद हुआ था। परिवार का आरोप है कि भाजपा से जुड़े होने के कारण विद्युत को निशाना बनाया गया था। जमीन पर कब्जे और रंगदारी मांगने के विवाद को लेकर उनके साथ मारपीट की गई थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। इस मामले में परिवार ने माकपा और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए थे। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष भी सामने आना बाकी है। घटना के बाद परिवार ने पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। परिजनों का दावा है कि शिकायत के बाद कुछ प्रभावशाली नेताओं ने उनके घर पहुंचकर बड़ी रकम देने का प्रलोभन दिया था। हालांकि, परिवार ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए न्याय की लड़ाई जारी रखने का फैसला किया।परिवार के सदस्यों का कहना है, ''हमें पैसे की जरूरत नहीं है, हम सही न्याय चाहते हैं।'' मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से नौकरी देने की घोषणा का उन्होंने स्वागत किया है। परिवार को उम्मीद है कि इस घोषणा के तहत उन्हें सरकारी सहायता मिलेगी। लेकिन उनकी सबसे बड़ी मांग है कि विद्युत की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले।
पवन जाना के परिवार को भी नौकरी की घोषणा से उम्मीद
दूसरी ओर, दांतन के कुसमी इलाके में पवन जाना की मौत ने भी पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश पैदा कर दिया था। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोगों के हमले से अपने पिता को बचाने की कोशिश के दौरान पवन की जान चली गई थी। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। लंबे समय से आर्थिक और मानसिक अनिश्चितता के बीच जीवन गुजार रहे पवन के परिजनों को भी मुख्यमंत्री की नौकरी देने की घोषणा से नई उम्मीद मिली है। परिवार को आशा है कि सरकार की ओर से किए गए वादे को जल्द अमलीजामा पहनाया जाएगा और उन्हें उचित सहायता मिलेगी। दोनों परिवारों के लिए मुख्यमंत्री की घोषणा केवल सरकारी नौकरी का आश्वासन नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के बीच भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद जागी है।