

राजेश, सन्मार्ग संवाददाता
बेलपहाड़ी : एक समय झाड़ग्राम जिले के बेलपहाड़ी का नाम सुनते लोगों के पसीने छूटने लगते थे। जिसके कारण था उन इलाकों में माओवादियों का बोलबाला। उन इलाकों में माओवादियों की ही चलती थी लेकिन अब वहां पर स्पाइस गार्डन बनाने पर विचार किया जा रहा है। बिनपुर विधायक प्राणनाथ टुडू ने कहा कि इस स्पाइस गार्डन के बारे में राज्य के हॉर्टिकल्चर विभाग के मंत्री अमिय किस्कू से भी बात हुई है। उन्होंने बेलपहाड़ी की टूरिज्म इंडस्ट्री को इस स्पाइस गार्डन से जोड़ने की योजना बनाई है। हॉर्टिकल्चर विभाग के मुताबिक, हालांकि यहां का मौसम केरल जैसा बारिश वाला और नमी वाला नहीं है, लेकिन बेलपहाड़ी का सूखा-खराब मौसम और लाल मिट्टी कई तरह के मसाले उगाना मुमकिन बनाती है। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सूखे मौसम की वजह से यहां हल्दी की अच्छी खेती होती है। बेलपहाड़ी में मेघालय में पैदा होने वाली अच्छी क्वालिटी की लाकाडोंग हल्दी पैदा होती है। इसके अलावा, झारग्राम की सूखी मिट्टी में अदरक, तेजपत्ता, लहसुन, सूखी मिर्च, धनिया, मेथी, जीरा, काला जीरा और मानसून और सर्दियों के प्याज की खेती होती है।
मालूम हो कि इस साल जिले भर में 260 हेक्टेयर जमीन पर हल्दी, 60 हेक्टेयर में अदरक, 2 हेक्टेयर में तेजपत्ता, 53 हेक्टेयर में लहसुन, 44 हेक्टेयर में धनिया, 10 हेक्टेयर में मेथी और करीब 102 हेक्टेयर जमीन पर सूखी मिर्च की खेती हुई है। नतीजतन, झारग्राम की भौगोलिक स्थिति और अलग-अलग जगहों की मिट्टी की अलग-अलग खासियतों की वजह से, इलाके के हिसाब से मसालों की खेती अच्छी होती है। जिला हॉर्टिकल्चर विभाग के एक अधिकारी ने कहा, 'बेलपहाड़ी में मसाला गार्डन लगाने के लिए सही माहौल है। अगर मसाला गार्डन लगाया जाता है, तो अच्छी पैदावार होगी।' इस इलाके में लौंग, इलायची और दालचीनी की खेती के लिए ज़रूरी मिट्टी और मौसम नहीं है। बेलपहाड़ी में न सिर्फ़ मसाला गार्डन बनाया जाएगा, बल्कि इससे पर्यटन स्थल को जोड़ने का प्लान भी बनाया गया है। हाल ही में, झारग्राम बंगाल टूरिज़्म के नक्शे पर काफ़ी लोकप्रिय हुआ है। पर्यटक भी बेलपहाड़ी आने लगे हैं। मसाला गार्डन घूमने के अलावा, टूरिस्ट ताज़े मसालों को पकाने का स्वाद भी ले सकेंगे। वे उन्हें अपने घरों के लिए भी खरीद सकेंगे। बिनपुर के विधायक प्राणनाथ टुडू ने कहा, 'बेलपहाड़ी में मसाला गार्डन बनाने के लिए मंत्री से बात हुई है। इसके बन जाने के बाद, इलाके के लोगों के लिए रोज़गार पैदा होगा।