कोलकाता : केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुलाई गई हाई-लेवल बैठक में पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत की मौजूदगी पूरी तरह गैर-कानूनी थी। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि 21 फरवरी को हुई बैठक के दौरान राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह बैठक विशेष रूप से SIR प्रक्रिया को लागू करने के तौर-तरीकों पर निर्णय लेने के लिए बुलाई गई थी और इसमें केवल नामित अधिकारियों को ही उपस्थित रहने की अनुमति थी। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि बैठक में केवल अधिकृत अधिकारी चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर, चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी, चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, एडवोकेट जनरल और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ही शामिल होंगे। इसके बावजूद मनोज पंत बैठक में उपस्थित थे, जबकि वह इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के अनुसार नहीं जा सकते थे। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। मनोज पंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इधर, तृणमूल कांग्रेस की नेता और राज्य सरकार में वरिष्ठ मंत्री शशि पांजा ने मजूमदार के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा निराधार दावे करने के लिए जानी जाती है। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस तरह के आरोप लगाने से पहले सबूत पेश करने चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता इस तरह की राजनीति को खारिज कर देगी।