

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पहले चरण के चुनावी प्रचार के अंतिम दिन झारग्राम के बिनपुर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उम्मीदवार और राज्य की वन मंत्री वीरबाहा हांसदा ने आदिवासी समुदाय के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को “झालमुड़ी नहीं, बल्कि दो वक्त की रोटी के लिए काम का अधिकार” चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया झाड़ग्राम दौरे और झालमुड़ी खाने को लेकर चल रही चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए हांसदा ने इसे “दुखद नाटक” करार दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग इस तरह की राजनीति से प्रभावित नहीं होते, बल्कि उनके लिए अन्न, वस्त्र और आवास जैसे बुनियादी मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
हांसदा ने कहा कि भले ही वह इस बार बिनपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन पूरा झाड़ग्राम जिला उनका “घर” है। बचपन की यादों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अपने पिता के साथ घूमते हुए उन्होंने इस क्षेत्र के लोगों का जीवन करीब से देखा है और उनके सुख-दुख को समझती हैं।
‘मनरेगा’ के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र के कई मजदूरों को लंबे समय से काम नहीं मिल रहा है, जबकि इस विषय पर प्रधानमंत्री मौन हैं। उनके अनुसार राज्य सरकार ने इन लोगों के साथ खड़े रहने की कोशिश की है, जबकि केंद्र सरकार ने सहयोग नहीं किया। उन्होंने बिनपुर में पेयजल संकट को भी एक बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
हांसदा ने वादा किया कि यदि वह चुनाव जीतती हैं, तो हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने अंत में कहा कि वह हमेशा “घर की बेटी” की तरह लोगों के साथ खड़ी रहेंगी और चुनाव परिणाम चाहे जो भी हो, क्षेत्र के विकास और लोगों के अधिकारों के लिए काम करती रहेंगी।