

रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
बारुईपुर : कुलतली ब्लॉक के मयपीठ-बैकुंठपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र के किशोरी मोहनपुर गांव में बुधवार सुबह ठाकुरान नदी की एक शाखा के किनारे ताज़ा रॉयल बंगाल टाइगर के पैरों के निशान मिलने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। निशान इतने साफ थे कि पंजे की उंगलियों के निशान और पैड तक साफ दिख रहे थे। ग्रामीणों ने तुरंत मयपीठ कोस्टल थाना और सुंदरवन टाइगर रिजर्व के वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की स्ट्राइक फोर्स और मयपीठ रेंज की टीम मौके पर पहुँच गई। टीम ने निशानों की माप ली और फोटोग्राफी की। प्रारंभिक जाँच में पुष्टि हुई कि यह नर बाघ के निशान हैं और करीब 12-15 घंटे पुराने हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन-चार दिनों से रात में बाघ की दहाड़ सुनाई दे रही थी। एक ग्रामीण शेख अब्दुल कहते हैं, “हमारे बच्चे अब स्कूल जाने से डर रहे हैं। खेत में काम करने जाना भी मुश्किल हो गया है।” हर साल नवंबर से फरवरी तक शीत ऋतु शुरू होते ही सुंदरवन के बाघ मानव बस्तियों में घुसने लगते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में सुंदरवन की नदियों और खाड़ियों में पानी का स्तर बहुत कम हो जाता है। ज्वार-भाटा कमजोर पड़ने से बाघ आसानी से कीचड़ भरे रास्तों से चलकर गांवों तक पहुँच जाते हैं। इसके अलावा जंगल के अंदर शिकार की कमी और मछली पकड़ने वाली नावों का शोर भी बाघों को बस्तियों की ओर खींचता है। वन विभाग के डीएफओ ने बताया, “हमने पूरे इलाके में ट्रैप कैमरे लगाने शुरू कर दिए हैं। गश्त बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को रात में बाहर न निकलने और समूह में चलने की सलाह दी गई है।” पिछले पांच सालों में कुलतली और आसपास के इलाकों में बाघों के हमले में 12 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुंदरवन के बाघ अब इंसानी इलाकों को ही अपना नया क्षेत्र मानने लगे हैं? जंगल की सीमा लगातार सिकुड़ रही है, नदियाँ चौड़ी हो रही हैं, मैनग्रोव कम हो रहे हैं। ऐसे में बाघ और इंसान के बीच टकराव बढ़ता ही जा रहा है। वन विभाग भले ही हर बार आश्वासन देता हो, लेकिन ग्रामीणों की नींद हर सर्दी में उड़ जाती है। इस बार भी वही डर लौट आया है।