

कोलकाता : राज्यसभा के पूर्व सांसद और पद्मभूषण से सम्मानित स्वपन दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, चुनाव प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग की SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को बाधित करना और राज्य में अस्थिरता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का संशोधन चुनाव आयोग का एक संवैधानिक दायित्व है, जिसका उद्देश्य फर्जी और अवैध नामों को हटाकर एक सटीक और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है। उनके अनुसार इस प्रक्रिया को राजनीतिक कारणों से विफल करने का प्रयास किया जा रहा है। स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति में गिरावट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उनके अनुसार राज्य में कानून के शासन की जगह शासक के कानून का वातावरण बन गया है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था प्रभावित हुई है। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश में होने वाली एसिड हमलों की घटनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पश्चिम बंगाल में दर्ज होता है, जबकि दोषियों के खिलाफ सजा की दर बेहद कम है। उन्होंने यह भी कहा कि अपराध में वृद्धि, राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार के मामलों विशेषकर एसएससी घोटाले ने राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाया है और उद्योग तथा निवेश के माहौल को भी प्रभावित किया है।