''NOTTO, ROTTO और SOTTO जैसी संस्थाओं की देरी से परेशान हैं सर्जन''

अंग प्रत्यारोपण की जटिलताओं और बिचौलियों के सिंडिकेट पर स्वास्थ्य मंत्री ने जताई नाराजगी
सांकेतिक चित्र
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मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखोपाध्याय ने अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी नियामक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और अवैध अंग व्यापार पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने देश में अंग प्रत्यारोपण को नियंत्रित करने वाली संस्थाओं, NOTTO (नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन), ROTTO (रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) और SOTTO (स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) की लालफीताशाही और अनुमति देने में होने वाली अत्यधिक देरी की कड़ी आलोचना की।

अनुमतियों में देरी से सर्जन परेशान

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में बेहतरीन और कुशल ट्रांसप्लांट सर्जन मौजूद हैं, लेकिन NOTTO, ROTTO और SOTTO जैसी संस्थाओं की ओर से अनुमतियां जारी करने में जानबूझकर पैर खींचे जाते हैं। इस प्रशासनिक और विनियामक देरी के कारण डॉक्टर और सर्जन बेहद परेशान रहते हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों तक समय पर अंग प्रत्यारोपण का लाभ नहीं पहुंच पाता। डॉ. मुखोपाध्याय ने अंगदान की दुनिया के कड़वे सच को उजागर करते हुए बताया कि इन विनियामक अड़चनों के पीछे एक बड़ा कारण ''जीवित गैर-रिश्तेदार दानदाता'' से जुड़ा अवैध व्यापार है।

''लिविंग अनरिलेटेड डोनेशन'' को बंद करने का आह्वान

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यदि अंग प्रत्यारोपण प्रणाली को पारदर्शी बनाना है और बिचौलियों के सिंडिकेट को खत्म करना है, तो हमें लिविंग अनरिलेटेड डोनर्स की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने का कड़ा संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि अंगदान केवल नि:स्वार्थ भावना से और ब्रेन डेड मामलों में कैडेवर डोनेशन (मृत्यु उपरांत अंगदान) के रूप में ही बढ़ावा पाना चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को सही समय पर जीवन मिल सके और दलालों का नेटवर्क खत्म हो।

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