

नयी दिल्ली : राज्यसभा में भाजपा के सांसद बाबूराम निशाद ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में कथित चूक के लिए राज्य सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन केवल गलती नहीं बल्कि संवैधानिक अपराध है। उच्च सदन में निषाद ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति के राज्य दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। उन्होंने कहा कि जब कोई राज्य सरकार देश के सर्वोच्च कार्यालय का जानबूझकर अपमान करती है, तो यह भूल जाती है कि वह संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आई है।
निशाद ने आगे कहा कि अब केवल निंदा प्रस्ताव पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष कानून, जैसे संवैधानिक जिम्मेदारी अधिनियम, बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती है, तो अनुच्छेद 356 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रियों और प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी उसी तरह कार्रवाई होनी चाहिए, जैसे कि अदालत में अवमानना के मामलों में होती है। निषाद ने जब यह मुद्दा उठाया तब तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया। दूसरी ओर भाजपा सदस्यों ने उनका पुरजोर विरोध किया।
मालूम हो कि राष्ट्रपति मुर्मू ने संथाल सम्मेलन के स्थल परिवर्तन पर अप्रसन्नता जताई थी। यह कार्यक्रम मूल रूप से सिलिगुड़ी के बिधाननगर में होना था, लेकिन सुरक्षा और अन्य व्यवस्थागत कारणों से इसे बागडोगरा हवाई अड्डा के समीप गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया।राष्ट्रपति के शनिवार दोपहर में कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने पर केवल कुछ लोग ही मौजूद थे। सिलिगुड़ी के महापौर गौतम देब ही हवाई अड्डा पर उनके स्वागत के लिए राज्य सरकार के प्रतिनिधि थे। मुर्मू ने कहा कि उन्हें “बहुत दुख हुआ” कि लोग सम्मेलन में नहीं पहुँच सके क्योंकि यह बहुत दूर आयोजित किया गया था। रविवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुर्मू के कार्यक्रम में किसी भी तरह का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ और किसी भी अव्यवस्था की जिम्मेदारी निजी आयोजकों और भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण पर है, जिन्होंने कार्यक्रम का स्थल उपलब्ध कराया।