

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद पर चुनाव आयोग ने दोनों धड़ों के लिए अलग-अलग नाम और प्रतीक तय कर दिए हैं। अब होने वाले उपचुनावों में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला धड़ा ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम से चुनाव लड़ेगा, जबकि अरूप रॉय के नेतृत्व वाले धड़े को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम दिया गया है।
चुनाव आयोग के 18 सितंबर के अंतरिम आदेश के अनुसार, ममता बनर्जी के गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है, जबकि अरूप रॉय के गुट को ‘लिफाफा’ प्रतीक मिला है। दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के साथ-साथ मेघालय और त्रिपुरा में भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना जाएगा।
दरअसल, इससे एक दिन पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को ‘All India Trinamool Congress’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि दोनों पक्ष पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं और इस विवाद पर अंतिम फैसला करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया की जरूरत है। फिलहाल आगामी उपचुनावों को देखते हुए दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान देने की व्यवस्था की गई है।
दोनों गुटों को अपने पसंदीदा नाम और चुनाव चिन्ह के तीन-तीन विकल्प देने को कहा गया था। इसके बाद आयोग ने उपलब्ध विकल्पों में से ममता गुट के लिए ‘Mamata All India Trinamool Congress’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ तथा अरूप रॉय गुट के लिए ‘Democratic Trinamool Congress’ और ‘लिफाफा’ को मंजूरी दी।
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से भी जुड़ा है। दोनों गुटों की ओर से इन सीटों पर नामांकन दाखिल किए गए हैं। आयोग ने नई पहचान इसलिए तय की है ताकि दोनों पक्ष अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ सकें।
हालांकि, इसे तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला नहीं माना गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दोनों गुटों के दावे की अंतिम सुनवाई और फैसला अलग प्रक्रिया के तहत होगा। तब तक ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह पर रोक जारी रहेगी।