

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। नामांकन वापस लेने से एक दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया।
संचिता प्रधान डे को ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया था। शुक्रवार को नामांकन वापस लेने के बाद ममता गुट के पास अब इस सीट से कोई उम्मीदवार नहीं रह गया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख भी शुक्रवार ही थी, इसलिए अब इस सीट पर नया उम्मीदवार उतारने का रास्ता नहीं बचा है।
संचिता के नामांकन वापस लेने के कुछ ही समय बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी नंदीग्राम में कांग्रेस के साथ रहेगी। ममता ने यह भी बताया कि कांग्रेस नेताओं की ओर से उनसे संपर्क किया गया था।
नंदीग्राम सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। यह सीट सुवेंदु अधिकारी के विधानसभा चुनाव में दो सीटों से जीतने के बाद खाली हुई थी। उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़कर भवानीपुर सीट बरकरार रखी थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी के गुट को नया नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किया। ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला है।
नंदीग्राम में अब ममता गुट की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं है और पार्टी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है।