

प्रीति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शनिवार को पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान उनके स्वागत में राज्य सरकार के शीर्ष प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शर्मनाक और पहले कभी नहीं हुई घटना बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तीकरण में विश्वास रखता है, वह इस घटना से दुखी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं और उन्होंने जो पीड़ा और दुख व्यक्त किया है, उससे भारत के लोगों को बहुत दुख हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार ने इस मामले में सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए राज्य का प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि यह भी बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल कल्चर जैसे जरूरी मुद्दे को इतने हल्के में ले रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान होना चाहिए। उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस को होश आएगा।
इधर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अपने अराजक व्यवहार में आज एक नया निचला स्तर छू लिया है। इसने प्रोटोकॉल की खुलेआम अनदेखी करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया। उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार न केवल अपनी मर्जी से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है बल्कि भारत के राष्ट्रपति को भी अपनी तानाशाही से नहीं बख्शती। भारत के सबसे ऊंचे संवैधानिक पद का अपमान, वह भी हमारे आदिवासी बहनों और भाइयों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में, हमारे देश और उन मूल्यों का अपमान है जो हमारे संवैधानिक लोकतंत्र को परिभाषित करते हैं। आज लोकतंत्र में विश्वास करने वाला हर नागरिक बहुत दुखी है।
दरअसल, शनिवार को जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल पहुंचीं तो उनके स्वागत के लिए राज्य सरकार के शीर्ष स्तर का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। बताया गया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य मंत्रिमंडल के किसी अन्य मंत्री ने राष्ट्रपति का स्वागत नहीं किया। सूत्रों के अनुसार, सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ही एकमात्र प्रतिनिधि थे, जो हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उपस्थित थे।