

कोलकाता : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को मायापुर स्थित इस्कॉन मुख्यालय का दौरा किया। वे 19वीं सदी के वैष्णव पुनरुत्थानवादी और गौड़ीय मठ के संस्थापक भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती पर आयोजित भव्य धार्मिक समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने इस्कॉन को विश्वभर में ‘सनातन धर्म’ का ध्वजवाहक बताते हुए कहा कि संगठन आपदा राहत, सामाजिक सेवा और मानव कल्याण के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहा है। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं यहां गृह मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि चैतन्य महाप्रभु के एक अनन्य भक्त के रूप में आया हूं। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से मायापुर आना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह यात्रा अब संभव हो सकी। उन्होंने भक्तिसिद्धांत सरस्वती के क्रांतिकारी विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म को रूढ़ियों से मुक्त कर यह सिद्ध किया कि आधुनिकता धर्म की विरोधी नहीं, बल्कि उसकी सहायक है।
गृह मंत्री ने मतुआ समुदाय के योगदान का भी उल्लेख किया
अमित शाह ने कहा कि भक्ति सिद्धांत सरस्वती का सबसे बड़ा योगदान भक्तिवेदांत प्रभुपाद जैसे महान शिष्य को तैयार करना था। आज विश्वभर में फैला इस्कॉन आंदोलन इन दोनों महान विभूतियों के जीवन-कार्य का प्रतिफल है। इस्कान की भूमिका की सराहना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आज देश के किसी भी राज्य में चले जाएं, हर भाषा में गीता उपलब्ध कराने का श्रेय उन्हें जाता है। चाहे स्कूल के बच्चे हों या लैपटाप पर काम करने वाला युवा, इस्कान ने सबको गीता के मार्ग से जोड़ा है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को भेंट में गीता ही देते हैं, क्योंकि यही विश्व कल्याण का संदेश है। गृह मंत्री ने मतुआ समुदाय के योगदान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस समुदाय ने हमेशा सामाजिक कल्याण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई है। केंद्रीय मंत्री ने इस्कॉन द्वारा मानवता की सेवा को रेखांकित करते हुए कहा कि संगठन की भूमिका भक्ति से परे है, जिसमें खाद्य वितरण शिविर और आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सबसे पहले मदद के लिए इसका पहुंचना शामिल है। उन्होंने गरीबों को स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ भारतीय त्योहारों के माध्यम से युवाओं को जोड़ने के क्षेत्र में इस्कॉन के कार्यों की भी सराहना की।
भारत 2047 तक विकसित भारत बनेगा और सनातन का संदेश पूरे विश्व में फैलेगा
अमित शाह ने भक्तिसिद्धांत ठाकुर द्वारा अपने जीवनकाल में एक अरब बार श्री कृष्ण नाम जप के संकल्प को पूरा करने का भी उल्लेख करते हुए इसे विश्व के लिए एक अलौकिक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि एक बार भक्ति भाव से यह नाम लेने पर चेतना जागृत हो जाती है, तो जिन्होंने एक अरब बार जप किया, उनका जीवन पूर्णत: कृष्णमय था। अमित शाह ने कहा कि इस पावन भूमि के आशीर्वाद से भारत 2047 तक विकसित भारत बनेगा और सनातन का संदेश पूरे विश्व में फैलेगा। शाह ने हरे कृष्ण महामंत्र के जयघोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।