झोपड़ी से सपनों के घर तक : ‘बांग्लार बाड़ी’ योजना ने खोका मियां की बदली जिंदगी

खोक़ा मियां भावुक होकर कहते हैं कि अब बारिश या तूफ़ान से डर नहीं लगता। परिवार के साथ चैन से सो पाता हूँ। इसके लिए मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद।
फाइल फोटाे
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कालचीनी : ग़रीबी की सबसे बड़ी मार तब महसूस होती है, जब इंसान के पास सिर छुपाने के लिए सुरक्षित छत भी न हो। बारिश, तूफ़ान और ठंडी रातों के बीच असुरक्षा में जीना कई परिवारों की मजबूरी होती है। लेकिन राज्य सरकार की बांग्लार बाड़ी योजना ऐसे ही हज़ारों परिवारों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बनकर आई है। इस योजना का जीता-जागता उदाहरण हैं कालचीनी ब्लॉक के उत्तर फ़ॉरवर्डनगर निवासी खोक़ा मियां, जिनकी ज़िंदगी एक जर्जर झोपड़ी से निकलकर आज पक्के घर की सुरक्षित दीवारों तक पहुंच चुकी है। वर्षों तक खोक़ा मियां अपने परिवार के साथ एक कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर थे। ज़रा-सी बारिश में घर के भीतर पानी भर जाता था और तेज़ हवा में दीवारें कांपने लगती थीं। हर रात डर के साये में कटती थी कि कहीं छत गिर न जाए। आर्थिक तंगी के कारण वे अपने दम पर पक्का घर बनवाने की सोच भी नहीं सकते थे। ऐसे में जब उनका नाम बांग्लार बाड़ी योजना के लाभार्थियों की सूची में शामिल हुआ, तो उनकी ज़िंदगी बदल गई। योजना के तहत मिले पक्के मकान ने न सिर्फ़ उन्हें सुरक्षित छत दी, बल्कि पूरे परिवार को एक नई गरिमा और आत्मविश्वास भी दिया। खोक़ा मियां भावुक होकर कहते हैं कि अब बारिश या तूफ़ान से डर नहीं लगता। परिवार के साथ चैन से सो पाता हूँ। इसके लिए मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद। लताबाड़ी ग्राम पंचायत के सदस्य अमूल्य राय ने बताया कि पहले खोक़ा मियां बेहद जर्जर कच्चे घर में रहते थे, लेकिन ‘बांग्लार बाड़ी’ योजना के तहत उन्हें पक्का मकान दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना से इलाके के कई ग़रीब और असहाय परिवारों को स्थायी और सुरक्षित आवास मिला है।

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