

कोलकाता : पर्यावरणविद् एस.एम. घोष ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास को प्राथमिकता दी गयी है, जिसमें हरित अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश पर विशेष ध्यान है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण कल्याण के लिए 1,885 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं, लेकिन इसमें वायु आयनाइजर और धूल सोखने वाले उपकरणों के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखता। सरकार ने दिल्ली और एनसीआर राज्यों को 2026 के लिए साल-भर चलने वाली व्यापक स्वच्छ वायु योजनाएं बनाने के निर्देश दिये हैं, जिनमें सड़क की धूल, यातायात जाम और औद्योगिक उत्सर्जन को प्राथमिकता के तौर पर शामिल किया गया है। घोष के अनुसार, वायु प्रदूषण पर त्वरित कार्रवाई के लिए वैकल्पिक तकनीकों और स्थानीय स्तर पर प्रभावी उपायों की जरूरत है। नदी प्रदूषण पर उन्होंने कहा कि सरकार 2022-23 से 2024-25 के बीच 9,470 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, फिर भी कई नदियां अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरे से दूषित बनी हुई हैं।