पत्नी की मुस्कान को अमर करने के लिए 88 वर्षीय पति ने बनाया उसका चेहरा

59 साल के साथ में हर मुश्किल में पत्नी बनीं हमसफर, अब बिस्तर पर हैं अंजलि
पत्नी की मुस्कान को अमर करने के लिए 88 वर्षीय पति ने बनाया उसका चेहरा
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मध्यमग्राम : उम्र के इस पड़ाव पर जब जिंदगी की पुरानी यादें ही सबसे बड़ा सहारा बन जाती हैं, मध्यमग्राम के 88 वर्षीय भूपतिरंजन देवनाथ ने अपनी पत्नी की मुस्कान को हमेशा के लिए सहेजने की कोशिश की है। छह महीने से बिस्तर पर पड़ी पत्नी अंजलि की कभी खिलखिलाती मुस्कान को याद करते हुए उन्होंने अपने हाथों से उनके चेहरे की प्रतिकृति तैयार कर दी। आज घर के एक शोकेस में रखी प्लास्टर ऑफ पेरिस की वह प्रतिमा भूपति के लिए सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि 59 वर्षों के वैवाहिक जीवन की सबसे खूबसूरत याद है। मध्यमग्राम के रहने वाले भूपतिरंजन ने मध्यमग्राम हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में लंबे समय तक पढ़ाया। करीब तीन दशक पहले सेवानिवृत्त हुए। उनकी पत्नी अंजलि की उम्र भी 70 वर्ष के पार है। दंपति की दो बेटियां और एक बेटा था। दोनों बेटियों की शादी मध्यमग्राम में ही हुई है। कोरोना महामारी के दौरान इकलौते बेटे को खोने के बाद अब बहू और पोते की जिम्मेदारी भी इसी बुजुर्ग दंपति पर है। भूपति की पेंशन से परिवार का खर्च चलता है। इन सबके बीच पिछले छह महीने से अंजलि उम्र संबंधी बीमारियों के कारण पूरी तरह बिस्तर पर हैं। हालत ऐसी है कि अब वह अपने हाथ से ठीक तरह से हस्ताक्षर तक नहीं कर पातीं। कभी घर की तमाम जिम्मेदारियां संभालने वाली अंजलि की जिंदगी अब बिस्तर तक सिमट गयी है। लेकिन भूपति के जेहन में आज भी उनकी पत्नी की वही पुरानी मुस्कान बसी है। उनका कहना है कि अंजलि को हमेशा हंसना पसंद था। दांपत्य जीवन में कितनी भी मुश्किलें आयीं, उन्होंने कभी अपने चेहरे की मुस्कान को गायब नहीं होने दिया। भूपति के लिए वही मुस्कान मुश्किल दिनों में हिम्मत देने वाली थी। हाथ से चीजें बनाने में माहिर रहे भूपति ने इसी हुनर को एक बार फिर इस्तेमाल किया। मिट्टी, नारियल के खोल, पेड़ की टहनियों और घर में बेकार समझी जाने वाली चीजों से वह पहले भी कई कलाकृतियां बना चुके हैं। उन्हीं हाथों ने इस बार पत्नी के चेहरे की वह प्रतिकृति तैयार की, जिसमें अंजलि की पुरानी मुस्कान को जीवित रखने की कोशिश की गयी है। अब भूपति अक्सर पत्नी के पास बैठते हैं। कभी उनकी ओर देखते हैं तो कभी सामने रखी उस प्रतिमा को निहारते रहते हैं। उन्हें पता है कि बीता हुआ समय लौटकर नहीं आएगा, लेकिन उनकी एक ही इच्छा है—अंजलि जल्द स्वस्थ हों और फिर से अपने पैरों पर चल सकें। 59 साल के इस साथ में पत्नी ने जिस तरह हर मुश्किल घड़ी में उनका हाथ थामा, अब जीवन के इस अंतिम पड़ाव पर भूपति भी उसी साथ को पूरी शिद्दत से निभा रहे हैं। अंजलि की खो चुकी मुस्कान को उन्होंने भले ही प्रतिमा में सहेज लिया हो, लेकिन उनकी असली मुस्कान लौटने का इंतजार आज भी उनकी आंखों में साफ दिखाई देता है।

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