

बस्ती : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस्ती में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष भी हिंदू आस्था से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने की कोशिश कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या से सरयू नदी का जल लेकर श्रद्धालु जब बस्ती स्थित बाबा भदेश्वरनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए कांवड़ यात्रा निकालते हैं, तब उनकी सरकार श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत करती है।
उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के समय कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और 84 कोसी परिक्रमा जैसे धार्मिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया जाता था, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है।
सीएम योगी ने तंज कसते हुए कहा कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी भगवा वस्त्र पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होते दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अब जनता की आस्था और धार्मिक भावना की ताकत का एहसास हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख को हनुमानगढ़ी से जुड़े पुराने विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उनके अनुसार, उस घटना से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई थीं।
दरअसल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से अपनी राजनीतिक रणनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रमुखता देते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे भारतीय जनता पार्टी की हिंदुत्व आधारित राजनीति का मुकाबला करने के लिए अपेक्षाकृत 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी क्रम में हाल ही में उनकी शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। इस मुलाकात के दौरान सामने आई तस्वीरों में अखिलेश यादव शंकराचार्य के चरणों के समीप बैठे दिखाई दिए।
इसी मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। बस्ती की जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने विशिष्ट अंदाज में तंज कसते हुए कहा कि चुनावी राजनीति में जनता को भ्रमित करने के लिए कुछ लोग समय-समय पर अपना स्वरूप बदल लेते हैं।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि जो लोग पहले आस्था और सनातन परंपराओं का विरोध करते थे, वही अब राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक प्रतीकों और संत महात्माओं का सहारा लेने का प्रयास कर रहे हैं।