

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की रणनीति के तहत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने उम्मीदवारों के चयन में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। पार्टी गुजरात में अपनाई गई टिकट वितरण की रणनीति को उत्तर प्रदेश में लागू करने पर विचार कर रही है।
आंतरिक सर्वे में 124 मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया है। ऐसे में 100 से अधिक विधायकों के टिकट कटने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, उम्मीदवारों के टिकट को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की ओर से लिया जाएगा।
भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मौजूदा विधायकों के कामकाज और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता का आकलन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आंतरिक सर्वे में 124 विधायकों की स्थिति अच्छी नहीं पाई गई है। इनमें लगभग 40 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं, जो कम से कम दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।
पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जिन विधायकों की रिपोर्ट कमजोर है, उनके दोबारा उम्मीदवार बनने की संभावना कम हो सकती है। हालांकि, केवल टिकट काटने का संदेश देने के लिए किसी विधायक को चुनावी दौड़ से बाहर नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों के चयन में ठोस आकलन और जीतने की क्षमता को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
भाजपा की रणनीति के पीछे पिछले विधानसभा चुनावों के अनुभव भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान गठबंधन ने 104 मौजूदा विधायकों की सीटों पर उम्मीदवार बदल दिए थे। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत सीटों पर जीत मिली थी।
इसके विपरीत, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मौजूदा सांसदों पर भरोसा करने का अपेक्षित लाभ नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने 49 मौजूदा सांसदों को फिर से टिकट दिया था, लेकिन इनमें से केवल 17 उम्मीदवार ही जीत सके। इन नतीजों से पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में बदलाव और स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन के आकलन को अधिक महत्व देने का सबक लिया है।
गुजरात में भाजपा के चुनावी अनुभव को उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी ने लगभग 23 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के टिकट बदले थे। उस चुनाव में भाजपा की सीटों की संख्या 115 से घटकर 99 रह गई थी।
इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 99 में से 45 सीटों पर मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट नहीं दिया। इन 45 सीटों में से 43 पर पार्टी को जीत मिली और विधानसभा में उसकी कुल सीटें बढ़कर 156 हो गईं। इसी अनुभव के आधार पर उत्तर प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर उम्मीदवार बदलने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।