श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है श्रीमद्भागवत कथा

श्याम नारायण महाराज ने कहा
श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है श्रीमद्भागवत कथा
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सन्मार्ग संवाददाता

बलिया(उ.प्र) : श्रीमद्भागवत कथा साक्षात् श्रीकृष्ण का स्वरूप है।इसमें हम भगवान श्रीकृष्ण का अनुभव कर सकते हैं।जब हमारे कई जन्मों का पुण्य एकत्रित होता है और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा होती हैं तब हमें श्रीमद्भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलता है।श्रीमद्भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती हैं। मृत्यु जीवन को रूला रही हो तो श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कीजिए,मृत्यु रूलाएंगी नहीं, महोत्सव बना देगी।

राजा परीक्षित जब शुकदेव मुनि से श्रीमद्भागवत का श्रवण किया तो वे मृत्यु को महोत्सव मान लिया। श्रीकृष्ण की यह कथा मनुष्य को आनंद देती है और उसके समस्त कामनाओं को पूरा करती है। भजन-भक्ति के माध्यम से संत हृदय में भगवान को स्थापित करते हैं। वृंदावन में जब भक्ति के बेटे ज्ञान और वैराग्य बूढ़े हो गए तो भक्ति नारदजी से अपनी पीड़ा बताई ।भक्ति की पीड़ा को मुक्त करने के लिए नारद जी वेद,उपनिषद आदि कथा सुनाएं पर ज्ञान और वैराग्य वैसे ही बूढ़े रहे।जब नारद के आग्रह पर सनतकुमार ने श्रीमद्भागवत कथा सुनाएं तब ज्ञान और वैराग्य जवान हो गए,भक्ति में वृद्ध हुई। भक्ति प्रसन्न होकर बोली ,मैं कहां रहूं?

सनतकुमार ने कहा कि सबके हृदय में निवास करो जो भगवान के नाम को स्मरण करता हो। जीवन में प्रभु की कृपा चाहिए तो भगवान के नाम का जाप बढ़ाएं।ईश्वर की इच्छा में अपनी इच्छा को जोड़ दीजिए तब जीवन में आनंद ही आनंद का अनुभव कीजिए। ईश्वर और संत किसी को दुख नहीं देते अपितु सब पर कृपा करते हैं।दीपक की तरह संत जलकर जगत में रोशनी फैलाते हैं।संत का फल है सत्संग।

आत्मदेव को जब संतान नहीं हुआ तो एक संत ने उन्हें फल दिया कि इसे अपनी पत्नी को खिला दो पर वह खाई नहीं गाय को खिला दी।गाय से गोकर्ण का का जन्म हुआ। गोकर्ण ने जब अपने भाई धुंधकारी को श्रीमद्भागवत सुनाया तो वह प्रेत योनि से मुक्त हुआ। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से ज्ञान, भक्ति,वैराग्य और मोक्ष की सहज प्राप्ति होती है।

ये बातें तिवारी परिवार के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा पर प्रवचन करते हुए आचार्य श्यामनारायण महाराज(सोनू ओझा)ने गांव नेमछपरा(राजपुर,एकौना,हल्दी) में कही।कथा के मुख्य यजमान मंजू-विद्यासागर तिवारी ने पंडित रोहित पाण्डेय-उज्ज्वल कुमार पाण्डेय के निर्देशन में व्यासपीठ का पूजन किया।कथा के आयोजक बेबी तिवारी- रामकथावाचक पुरुषोत्तम तिवारी ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।कथा को सफल बनाने में सत्यनारायण तिवारी,दयासागर,राजनायण,अंजनी कुमार,आशुतोष,अंशुमान ,अर्पित तिवारी, उमरावती दुबे ,जया ओझा सहित अन्य सक्रिय हैं।

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