अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर CM योगी बोले- ‘ग्लोबल वार्मिंग’ मानवता के लिए नयी चेतावनी

वन प्रकृति के संतुलन का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करता है
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘अरण्य समागम’ के तहत ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘अरण्य समागम’ के तहत ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन और पर्यावरण संतुलन पर विशेष जोर देते हुए शनिवार को कहा कि वन, जीवन का आधार हैं और प्रकृति के संतुलन का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘अरण्य समागम’ के तहत ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ग्लोबल वार्मिंग’ और ‘ग्लोबल कूलिंग’ जैसी समस्याएं मानवता के लिए नयी चेतावनी हैं।

आदित्यनाथ ने एक कहावत का उल्लेख करते हुए कहा, भारत की ऋषि परंपरा में सदैव कहा गया है कि दस कुओं के समान एक बावड़ी, 10 बावड़ियों के समान एक तालाब, 10 तालाबों के समान एक पुत्र और 10 पुत्रों के समान एक वृक्ष होता है।

मुख्यमंत्री ने वृक्षों के महत्व पर जोर देते हुए कहा, प्रकृति में वृक्ष की महत्ता सर्वोपरि मानी गई है। यदि वन हैं तो जल है, जल है तो वायु है और यदि वायु है तो जीवन है। जीवन की कल्पना इनके बिना नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष ‘वन और अर्थव्यवस्था’ को मुख्य विषय के रूप में रखा गया है, जो यह संकेत देता है कि वनों के माध्यम से आर्थिक विकास और मानव कल्याण की दिशा में बेहतर ढंग से कैसे आगे बढ़ा जा सकता है।

योगी ने कहा कि भारत की वैदिक परंपरा से लेकर आज तक प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश दिया गया है, लेकिन आधुनिक दौर में प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषियों ने कहा था, धरती हमारी माता है और हम सब उसके पुत्र हैं। प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह धरती के सम्मान, सुरक्षा और संरक्षण के लिए सजग रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हर नागरिक आत्ममंथन करे कि कहां चूक हुई, जिसके कारण मौसम चक्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने लोगों से वनों के प्रति जागरूक रहने और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने का आह्वान किया।

समारोह को वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना और वन राज्य मंत्री केपी मलिक ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए वन अधिकारी भी शामिल हुए।

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