लखनऊ की झुग्गी बस्ती में भीषण आग, 2 मासूमों की मौत; सैकड़ों झोपड़ियां खाक

प्रशासन व राहत एजेंसियां रातभर मलबे में तलाश और सहायता में जुटीं
अग्निकांड
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर स्थित एक झुग्गी बस्ती में बुधवार को लगी भीषण आग में दो बच्चों की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पुलिस उपायुक्त (पूर्व) दीक्षा शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों बच्चों (जिनकी उम्र लगभग 2 साल थी) के शव बुधवार देर रात एक बड़े तलाशी अभियान के बाद बरामद किये गये। उन्होंने संवाददाताओं को बताया, शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उनके माता-पिता को सूचित कर दिया गया है।

विकास नगर थाना क्षेत्र में बुधवार शाम रिंग रोड के पास स्थित एक झुग्गी बस्ती में भीषण आग लग गई थी जिसने तेजी से सैकड़ों झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में झुग्गी बस्ती में रहने वाले तमाम लोगों की झोपड़ियां राख में तब्दील हो गयी थीं। उन्होंने बताया, मैंने तो 50 हजार रुपये का कर्ज भी लिया था लेकिन अब सब कुछ जलकर खाक हो गया है।

शर्मा ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही तुरंत दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और बिना किसी देरी के बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिए गए। ग्निकांड में नष्ट हुई झुग्गी बस्ती में रहने वाले मूल रूप से सीतापुर के महमूदाबाद के निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उनके परिवार में होने वाली एक शादी के लिए उन्होंने जो दो-तीन लाख रुपये का सामान इकट्ठा किया था वह सब जलकर नष्ट हो गया।

उन्होंने बताया कि पुलिस, अग्निशमन विभाग, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम बुधवार शाम से ही घटनास्थल पर तैनात हैं। लगातार राहत कार्यों में जुटी हुई हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आग में लगभग 200 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं जिससे उनमें रहने वाले सैकड़ों लोग बेघर हो गए। इनमें ज्यादातर घरेलू कामगार और दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बुधवार को ही घटनास्थल का दौरा किया था और अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जिलाधिकारी विशाख जी. भी मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घटना को लेकर चिंता प्रकट की और तत्काल राहत पहुंचाने का निर्देश दिया।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल राहत पहुंचाने तथा गहन जांच की मांग की।

अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। झुग्गी बस्ती में लगी आग में अपना आशियाना राख होने के बाद बृहस्पतिवार सुबह मौके पर पहुंचे लोग राख के ढेर में अपनी चीजों की तलाश करते दिखे।

पुरुष, महिलाएं और बच्चे कालिख और मलबे की परतों को खोदते हुए दिखे, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कोई कीमती चीज मिल जाए लेकिन ज्यादातर लोग खाली हाथ ही लौटे। अग्निकांड में अपना आशियाना खो चुकी एक महिला ने कहा, कुछ न बचा, सब जल गवा।

इलाके में तबाही के खौफनाक निशान साफ ​​दिख रहे थे। जली हुई अलमारियां, अधजले सिकुड़े संदूक, टूटी हुई साइकिलें, जले हुए बर्तन, गैस के चूल्हे और बिखरे हुए कपड़े। कुछ जगहों पर, रसोई के रैक में आधी जली हुई सब्जियां पड़ी थीं, जबकि कूलर, पंखे और यहां तक ​​कि फ्रिज भी जलकर खाक हो चुके थे।

हवा में अब भी धुएं की तेज गंध महसूस की जा सकती है और मलबे के कुछ हिस्सों से धुआं भी निकल रहा था। कई लोगों के लिए यह नुकसान सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि बहुत ही निजी और गहरा भी है।

लोगों के घरों में चौका-बर्तन करके अपने परिवार का पालन पोषण करने वाली दीपा ने बताया कि उन्होंने कई साल तक एक-एक रुपया जोड़कर अपनी गृहस्थी बसाई थी लेकिन आग में सब कुछ स्वाहा हो गया।

घरों में जाकर काम करने वाली एक और महिला ने कहा, पति के गुजर जाने के बाद मैंने 20 साल से ज्यादा समय में अकेले ही कुछ पैसे और गहने जमा किए थे। मैंने घरों में काम करके अकेले ही अपने पांच बच्चों को पाला-पोसा, लेकिन आग ने मेरी सारी जमा-पूंजी निगल ली।

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