युद्ध जैसे हालात में संसद और सरकार की प्राथमिकताएं उसी के अनुरूप हो : अखिलेश

'युद्ध कालीन हालात' को देखते हुए संसद में संबंधित विषयों को दी जाए प्राथमिकता
अखिलेश यादव
अखिलेश यादव
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लखनऊ : समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 'युद्ध कालीन हालात' की वजह से संसद के बजट सत्र के द्वितीय चरण में विभिन्न विषयों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है।

सपा प्रमुख ने सोमवार को 'एक्स' पर एक सूची डालते हुए लिखा, जब संसद के बजट सत्र का अंतराल हुआ था तब विषय अलग थे। आज के युद्धकालीन हालात की वजह से, संकट के इस माहौल में हमारी प्राथमिकता निम्नलिखित विषयों पर होनी चाहिए।

उन्होंने सूची के पहले बिंदु में अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त रूप से ईरान के साथ युद्ध किए जाने के सिलसिले में भारत का पक्ष और राय संसद में रखे जाने की जरूरत बताई। सपा प्रमुख ने भारत की विदेश नीति को 'गिरवी' रखे जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में इस विषय पर भी चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने भारत को रूस से तेल लेने की कथित इजाजत दिए जाने के मुद्दे का भी जिक्र करते हुए कहा कि तेल जैसी आपूर्ति पर आत्मनिर्णय की जगह अमेरिकी आदेश का आना भी संसद में चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता के सवाल पर भी चर्चा की जानी चाहिए।

सपा प्रमुख ने युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय लोगों और पर्यटकों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि संसद में इन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा एवं उनकी सकुशल भारत वापसी के सवाल को भी प्राथमिकता देते हुए इस पर चर्चा की जानी चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाल ही के इजरायल दौरे पर गए पत्रकारों की सुरक्षित वापसी के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि संसद में इस मुद्दे को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने युद्ध के कारण जरूरी आपूर्ति को नियमित और सुनिश्चित करने के साथ ही उनके बढ़ते दामों को नियंत्रित करने के विषय पर भी संसद में चर्चा किए जाने की जरूरत बताई।

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