

वाराणसी : वाराणसी में जिला प्रशासन ने काशी रेलवे स्टेशन परिसर के अंदर स्थित एक मजार और एक मस्जिद की इमारत को ध्वस्त करा दिया।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि यह कार्रवाई जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे एक विवाद में अदालत के आदेश के बाद मंगलवार की रात को की गई। अधिकारियों का दावा था कि यह जमीन रेलवे की है।
मुस्लिम पक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि यह मस्जिद कई सौ साल पुरानी थी। अजगैब शहीद के नाम से जानी जाने वाली यह मजार भी इस जगह पर लंबे समय से मौजूद थी। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि यह जमीन रेलवे की पुरानी संपत्ति का हिस्सा थी और पिछले कुछ सालों में इस पर कब्जा कर लिया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक यह मामला साल 2024 में शुरू किए गए 'काशी मॉडल रेलवे स्टेशन' प्रोजेक्ट के तहत कराये गये जमीन के सर्वे के दौरान सामने आया।
एक अधिकारी ने बताया कि जमीन के रिकॉर्ड की पैमाइश और जांच के दौरान यह मजार और मस्जिद रेलवे की जमीन पर बनी होने की बात सामने आने पर संबंधित लोगों को कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया था लेकिन जमीन खाली नहीं किए जाने पर मामला अदालत में पहुंचा था।
अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में अदालत ने धार्मिक स्थल पर दावा जता रहे पक्ष के खिलाफ फैसला सुनाया। अदालत के फैसले के बाद रेलवे ने एक नोटिस जारी करके वहां रहने वालों को इमारतें हटाने का निर्देश दिया। आदेश का पालन नहीं किये जाने पर प्रशासन ने मंगलवार रात को इमारतों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी।
अधिकारियों ने दावा किया कि जिस जगह पर मस्जिद और मजार बनाई गई, वहां पहले कभी हनुमान मंदिर हुआ करता था जिसे हटा दिया गया था।
उन्होंने बताया कि अवैध कब्जा हटाए जाने के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। इस दौरान रेलवे स्टेशन के आसपास के पूरे इलाके को 'सुरक्षा जोन' में तब्दील कर दिया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई।