राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: महाकुंभ 2025 के दान, प्राण प्रतिष्ठा से पहले‑बाद के पैटर्न और स्टाफ भर्ती पर SIT की गहन जांच

कथित चोरी की जांच में एसआईटी ने चढ़ावे के आभूषणों के मूल्यांकन, कर्मचारियों व उनके रिश्तेदारों की संपत्ति, सुरक्षा स्टाफ की भूमिका और ट्रस्ट पदाधिकारियों से पूछताछ के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी शुरू की
Ayodhya
महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में हुई चढ़ावे की चोरी?
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अयोध्या : अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) लखनऊ लौट चुकी है। एसआईटी की टीम अब जल्द ही प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। सूत्रों की मानें तो एसआईटी ने जांच में पिछले साल 2025 के महाकुंभ के दौरान आए चढ़ावे को लेकर खास फोकस किया गया है। इसकी वजह यह है कि एसआईटी यह देखना चाहती है कि जब महाकुंभ में करोड़ों की भीड़ आ रही थी, तब चढ़ावे में उसी अनुपात में बढ़ोतरी हुई या नहीं , यह जांच का हिस्सा है। साथ ही, मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पहले और बाद में आए चढ़ावे के पैटर्न को लेकर भी एसआईटी ने छानबीन की है।  एसआईटी ने स्टाफ भर्ती के दस्तावेज भी जांच में शामिल किए हैं, ताकि ये समझा जा सके कि स्टाफ की भर्ती के दौरान क्या-क्या देखा जाता था, किस आधार पर भर्ती की गई। 

कर्मचारियों के रिश्तेदारों की भी होगी जांच  

राम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी की जांच कर रही एसआईटी संदिग्ध कर्मचारियों के रिश्तेदारों की आर्थिक स्थिति  को लेकर भी जांच कर रही है, ताकि यह समझा जा सके कि कर्मचारियों ने कहीं अपने किसी परिजन या रिश्तेदार के नाम से संपत्ति या व्यापार तो खड़ा नहीं किया है। साथ ही, राम मंदिर परिसर में लंबे समय से कर्मचारी के तौर पर काम करने वाले और सुरक्षा के काम में लगे कुछ लोगों पर भी एसआईटी की नजर है। 

आभूषणों की कीमत का आंकल करने वाले भी रडार पर   

एसआईटी की जांच में एक एंगल यह भी है कि चढ़ावे के तौर पर मिले आभूषणों की कीमत का आंकलन कैसे होता था ? कहीं ऐसा तो नहीं कि आभूषण ज्यादा कीमत के आए और उसे कम करके पर्ची तैयार की गई, इसके बाद जितना हिस्सा कागजों में नहीं दिखाया गया, उसकी बंदरबांट कर ली गयी? ऐसे में सोने-चांदी और हीरे समेत अन्य आभूषणों की कीमत के आंकलन के काम में लगे कर्मचारी भी जांच के घेरे में हैं। 

कितने दिन अयोध्या में रही एसआईटी? 

राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी ने उत्तर प्रदेश का सियासी माहौल बदल दिया है। मामला सामने आने के बाद योगी सरकार के निर्देश पर एसआईटी बनाई गई, जिसने मामले की जांच की। तीन सदस्यीय एसआईटी की टीम 6 दिन बाद  शनिवार 20 जून की देर शाम अयोध्‍या से लखनऊ लौट गई। SIT ने 100 से अधिक लोगों को जांच के दायरे में लिया है। साथ ही, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत गोपाल राव डॉ. अनिल मिश्रा और रामशंकर उर्फ 'टिन्नू यादव' से पूछताछ की।  मामले की जांच पूरी करने के लिए एसआईटी को 15 दिन का समय दिया गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट 7 दिन में सरकार को सौंपनी थी। ऐसे में पूरी संभावना है कि बहुत जल्द एसआईटी सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी। 

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