मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग, पांच की मौत

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग, पांच की मौत

मोदी ने दिया मदद का भरोसा
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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग, पांच की मौत, मोदी ने दिया मदद का भरोसा

मुख्यमंत्री खेमचंद ने मोदी से मिलकर उठाए विकास के मुद्दे

इंफाल/नयी दिल्ली :

मणिपुर में शांति बहाली के प्रयासों के बीच सशस्त्र समूहों के बीच ताजा झड़पों में पांच लोगों की मौत हो गई है। राज्य में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने शनिवार को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सरकार को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सुधारने, विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने प्रधानमंत्री को बताया कि इंफाल-दीमापुर-गुवाहाटी बस सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (इंफाल-सिलचर मार्ग) और राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (इंफाल-दीमापुर मार्ग) पर मालवाहक ट्रकों की आवाजाही भी बहाल हुई है। राज्य सरकार विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की कमी दूर करने के लिए भी प्रयास कर रही है।मुख्यमंत्री ने कुछ राज्य राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्गों में उन्नत करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने का आग्रह किया। उन्होंने इंफाल स्थित क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का दर्जा देने की मांग भी उठाई। बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने हिंसा प्रभावित राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की जानकारी साझा की। खेमचंद सिंह ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात को सौभाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य सरकार मणिपुर के लोगों के लिए स्थायी शांति, स्थिरता और समावेशी समृद्धि सुनिश्चित करने के संकल्प पर कायम है। उन्होंने 'विकसित भारत' के तहत शांतिपूर्ण, समृद्ध और विकसित मणिपुर के निर्माण की प्रतिबद्धता भी जताई।

कामजोंग और उखरुल में पांच लोगों की मौत

इस बीच, कामजोंग और उखरुल जिलों में सशस्त्र समूहों के बीच हुई ताजा झड़पों ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कामजोंग जिले के कुकी बहुल चसाद गांव में 22 वर्षीय युवक और 42 वर्षीय महिला की मौत हो गई। पांच बच्चों की मां महिला को शुक्रवार रात गर्दन के पास गोली मारी गई थी। उसकी मौत के बाद कुकी और नगा समुदायों के सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही। इस दौरान 10 घरों में आगजनी भी की गई। हिंसा को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने चसाद पुलिस गेट चौराहे के 400 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 162 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। एक अन्य घटना में संदिग्ध उग्रवादियों ने म्यांमा सीमा के पास तंगखुल नगा समुदाय की बस्ती वाले निंगचौ गांव में गोलीबारी की। इसमें नगाचांसो निंगशेन (35) और लीशिशां लीशादांग (48) की मौत हो गई। ग्रामीणों का दावा है कि हमलावर गोलीबारी के बाद म्यांमा की ओर भाग गए। सुरक्षा बलों ने गांव पहुंचकर स्थिति नियंत्रित की। उखरुल जिले में चेपु याओलेन के पास एक वाहन पर गोलीबारी में चालक संदीप राय (40) की भी मौत हो गई। वहीं, कांगपोकपी जिले के मकुई अशांग और तापन क्षेत्रों में भी सशस्त्र गुटों के बीच भारी गोलीबारी की सूचना मिली है।

फरवरी से जारी हिंसा में 40 से अधिक मौतें

अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष फरवरी में कुकी और नगा समुदायों के बीच हिंसा शुरू होने के बाद से 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई घर जला दिए गए हैं। हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलांग और नोनी जिलों तथा सेनापति के कुछ हिस्सों में केंद्रित रही है। मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी व्यापक जातीय संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हुए हैं। सुरक्षा बल सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान चलाने तथा गश्त के जरिए स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की बैठक के साथ ताजा हिंसा की घटनाओं ने मणिपुर में शांति बहाली की चुनौती को फिर सामने ला दिया है।
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