बजट सत्र के पहले चरण में लोकसभा में हंगामा, राज्यसभा में ठीक से हुआ काम 

बजट सत्र के पहले चरण में लोकसभा में हंगामा, राज्यसभा में ठीक से हुआ काम 
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सर्जना शर्मा / अंजलि भाटिया

नयी दिल्ली : संसद के बजट सत्र का पहला चरण शुक्रवार को समाप्त हो गया और 9 मार्च तक संसद स्थगित कर दी गयी। ये सत्र बहुत हंगामेदार रहाबहुत सी ऐसी घटनाएं हुई जिनके कारण सत्ता पक्ष और विपक्ष में गतिरोध बना रहा जबकिराज्यसभा की कार्यवाही ठीक से चली। लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरेपर जबरदस्त आरोप प्रत्यारोप लगाए। लोकसभा में गतिरोध तब पैदा हुआ जब नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव न रख कर पूर्वथल सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब – फोर स्टार्स ऑफ डेस्टनीलेकर सदन में आ गए और पढ़ना शुरू कर दिया इस पर सत्ता पक्ष ने उनको बोलने नहीं दिया। राज्यसभा में लोकसभा की तुलना में कामकाज ठीक से चला।

शून्यकाल और प्रश्नकाल सुचारूरूप से चले। धन्यवाद प्रस्ताव और बजट प्रस्ताव पर ठीक से चर्चा हुई । चूंकि लोकसभामें प्रधानमंत्री मोदी को विपक्ष ने  राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने नहीं दिया तोराज्यसभा में उन्होंने लगभग 97 मिनट का भाषण दिया जिसमें कई बार लोकसभा में विपक्षको उनके आचरण के लिए आड़े हाथों लिया और संसदीय मर्यादाओं का सरासर उल्लंघन बताया।राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कई बार लोकसभा के गतिरोध कामुद्दा उठाना चाहा लेकिन सभापति सी पी राधाकृष्णन ने नियमों का हवाला देकर उनकोबोलने ही नहीं दिया। कांग्रेस का आरोप था कि सत्ता पक्ष राहुल गांधी को लोकसभा मेंबोलने नहीं दे रहा है। सभापति के रवैये के विरोध में कांग्रेस ने कई बार सदन सेवॉक आऊट किया इंडिया गठबंधन के अनेक दलों ने कांग्रेस का साथ दिया।

पश्चिम बंगाल में चूंकि विधानसभाचुनाव होने वाले हैं टीएमसी सांसद विशेष रूप से मुखर रहे बंगाल से संबंधित मुद्देचुन चुन कर उठाए। नए श्रम कानून मनरेगा ,मतदाता सूची जैसे विषयों पर टीएमसी ने पूरे13 दिन अपनी बात रखी। बंगाल के भाजपा सांसदों और टीएमसी सांसदों में सदन में आरोपप्रत्यारोप चले तीखी नोक झोक हुई। बजट का टीएमसी सांसदों ने पुरजोर विरोध किया।   नेता प्रतिपक्षमल्लिकार्जुन आमतौर पर सभापति पर भेदभाव का आरोप लगाते हैं उनका कहना है विपक्ष कोबोलने का मौका नहीं दिया जाता। सत्ता पक्ष पर नियम लागू नहीं किए जाते इस बारअंतिम दिन उन्होंने  अपने भाषण का बड़ाहिस्सा राज्यसभा के रिकॉर्ड से हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जतायी। उन्होंने कहा ‘सरकार के संसदीय कामकाज पर मेरी टिप्पणियों और प्रधानमंत्रीमोदी की नीतियों की आलोचना से जुड़े हिस्से को हटाया गया, यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है ।हटाए गए अंशों को बहाल किया जाए, यदि सदन में मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं उन्हें जनता केबीच साझा करने को बाध्य हो जाऊंगा।“  

खरगे ने कहा कि 04 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति केअभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान दिए गए उनके भाषण का महत्वपूर्णहिस्सा बिना उचित कारण या औचित्य के राज्यसभा के रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। कांग्रेसअध्यक्ष ने बताया कि राज्यसभा की वेबसाइट पर अपलोड किए गए भाषण की समीक्षा करने परउन्होंने पाया कि हटाए गए अंश मुख्य रूप से मौजूदा सरकार के संसदीय कामकाज परतथ्य-आधारित टिप्पणियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुछ नीतियों की आलोचना सेसंबंधित थे। खरगे ने कहा कि अगर कुछ नीतियां भारतीय जनमानस पर प्रतिकूल प्रभाव डालरही हैं तो नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उनकी आलोचना करना उनका संवैधानिक दायित्वहै। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बातें पूरी तरह धन्यवाद प्रस्ताव के दायरे में थींऔर चर्चा के विषय से जुड़ी हुई थीं।अपने पांच दशक से अधिक के संसदीय अनुभव काहवाला देते हुए खरगे ने जोर देकर कहा कि उन्होंने सदन की गरिमा, नियमों और भाषा की मर्यादा का हमेशा पालन किया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हटाए गए हिस्सों में कोई भी असंसदीय या अपमानजनक बात नहीं थी और नही नियम 261 का उल्लंघन हुआ था।कांग्रेसअध्यक्ष ने कहा कि उनके भाषण का इतना बड़ा हिस्सा रिकॉर्ड से हटाया जाना संविधानके अनुच्छेद 105(1) के तहत सांसदों को मिलीअभिव्यक्ति की आजादी के प्रति चिंता पैदा करता है। उन्होंने राज्यसभा सभापति सेमांग की कि हटाए गए अंशों पर पुनर्विचार किया जाए और उन्हें बहाल किया जाए। इस परनिर्मला सीतारमण ने सभापति का बचाव करते हुए कहा कि सभापति ने कुछ  भी नियमों के खिलाफ नहीं किया। बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ हुई थी, जो लोकसभा और राज्यसभा कीसंयुक्त बैठक में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षणपेश किया गया ।विशेष बात ये रही किसंसदीय इतिहास में पहली बार रविवार के दिन बजट पेश किया गया। चूंकि एक फरवरी कोरविवार था सरकार ने तब भी बजट पेश किया। कुल मिला कर इस सत्र के 13 कामकाजी दिन थे।

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