किन्नर समुदाय के सम्मान और पहचान का संदेश देगा 41 पल्ली क्लब

नट-बोल्ट से जिप तक, ‘द्वैत’ बताएगा साथ होने का महत्व
किन्नर समुदाय के सम्मान और पहचान का संदेश देगा 41 पल्ली क्लब
Published on: 

द्वैत’ थीम में दिखेगा समाज का दोहरा चेहरा

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : किन्नर समुदाय की पहचान, उनके अस्तित्व और समाज में उनके साथ होने वाले भेदभाव को केंद्र में रखते हुए हरिदेवपुर की 41 पल्ली पूजा समिति इस बार अपनी 69वीं वर्षगांठ पर एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक प्रस्तुति लेकर आ रही है। समिति का इस वर्ष का थीम ‘द्वैत’ है, जिसके जरिए एक ही अस्तित्व में मौजूद दो अलग-अलग रूपों और समाज की दोहरी सोच को कलात्मक अंदाज में सामने लाने की कोशिश की जा रही है। थीम का केंद्र किन्नर समुदाय है, जिसे अक्सर सामाजिक स्वीकार्यता और सम्मान के सवालों से जूझना पड़ता है। ‘द्वैत’ की अवधारणा केवल स्त्री और पुरुष के दो रूपों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति में मौजूद उन प्रतीकों से भी जुड़ती है, जहां दो अलग स्वरूप एक साथ पूर्णता का निर्माण करते हैं।

पायल, घुंघरू और नट-बोल्ट देंगे समानता का संदेश

पंडाल की सजावट में रोजमर्रा की कई वस्तुओं को प्रतीकात्मक रूप दिया गया है। पायल, घुंघरू, कैंची, नट-बोल्ट, जिप और डुगडुगी जैसी वस्तुओं के जरिए यह समझाने का प्रयास किया गया है कि कई संरचनाएं अपने दो हिस्सों के मेल से ही पूरी होती हैं। नट और बोल्ट का जुड़ाव हो या जिप के दो हिस्सों का साथ आना, दोनों यह संकेत देते हैं कि अलग-अलग हिस्सों का अस्तित्व एक-दूसरे से जुड़कर ही सार्थक होता है। इसी विचार को किन्नर समुदाय के सामाजिक जीवन से जोड़ते हुए समिति यह संदेश देना चाहती है कि पहचान अलग हो सकती है, लेकिन सम्मान और अस्तित्व का अधिकार सबका समान है।

क्लब के सेक्रेटरी ने यह कहा

क्लब के सेक्रेटरी सुरजीत राय ने बताया कि 41 पल्ली पूजा समिति हर साल एक नए और अनूठे थीम के माध्यम से दर्शकों के सामने समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रस्तुत करती है। इस वर्ष ‘द्वैत’ थीम के जरिए समिति ने मनोरंजन के साथ सामाजिक सोच पर विचार करने का संदेश दिया है। इस साल पूरे पंडाल का बजट 45 लाख रुपये है। उन्होंने बताया कि पंडाल केवल एक कलात्मक संरचना नहीं, बल्कि समाज के दोहरे रवैये को दर्शाने का प्रयास है। जहां हम अपनी जरूरतों और परंपराओं में विविधता को सहजता से स्वीकार करते हैं, वहीं इंसानों की पहचान के मामले में अक्सर भेदभाव करते हैं। ‘द्वैत’ इसी विरोधाभास पर सवाल उठाता है।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in