बर्मनाल्लाह में जूलॉजी छात्रों ने समुद्री जैव विविधता का किया अध्ययन

बर्मनाल्लाह में जूलॉजी छात्रों ने समुद्री जैव विविधता का किया अध्ययन
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सन्मार्ग संवाददाता,

श्री विजयपुरम :

दक्षिण फाउंडेशन और अंडमान एंड निकोबार एनवायरमेंटल टीम द्वारा बर्मनाल्लाह बीच पर आयोजित इंटरटाइडल कार्यक्रम ने समुद्री जैव विविधता को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय के जूलॉजी विभाग के छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का आयोजन फतेह जहान सिंह धालीवाल, श्री राम स्कूल मौलसरी, गुरुग्राम के सहयोग से किया गया, जिससे छात्रों को न केवल समुद्री जीवों को करीब से देखने बल्कि उनके प्राकृतिक पारितंत्र को समझने का भी अवसर मिला। महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. विवेक कुमार साहू और डॉ. संत कुमार ने छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ मौजूद रहे और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में समुद्री जैव विविधता संबंधी गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित कराया। अंडमान एंड निकोबार एनवायरमेंटल टीम के शोधकर्ताओं ने छात्रों को इंटरटाइडल जोन के महत्व, पारिस्थितिक संतुलन में इसकी भूमिका और संरक्षण से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था इंटरटाइडल बायोब्लिट्ज, जिसमें छात्रों ने तट पर मौजूद अधिकतम समुद्री जीवों की पहचान और फोटोग्राफी की। यह अभ्यास न सिर्फ उनके अवलोकन कौशल को निखारने वाला था, बल्कि उन्हें यह समझने का अवसर भी मिला कि ज्वार-भाटा के दौरान किन-किन जीवों का अस्तित्व इस क्षेत्र पर निर्भर होता है। विद्यार्थियों ने केकड़े, समुद्री घोंघे, स्टारफिश, एल्गी और अन्य अनेक प्रजातियों को निकट से देखा और उनका रिकॉर्ड संकलित किया।

इसके साथ ही “बीच बिंगो” नामक इंटरैक्टिव लर्निंग प्रतियोगिता ने कार्यक्रम को और रोचक बना दिया। इस दो घंटे की गतिविधि में छात्रों को टीमों में बांटा गया, और प्रत्येक टीम ने सूची में दर्ज समुद्री जीवों को ढूंढकर पहचानने का प्रयास किया। इसके अलावा, नई प्रजातियों का रिकॉर्ड करना भी इस गतिविधि का हिस्सा था। इससे छात्रों की टीम वर्क क्षमता और फील्ड रिसर्च में उनकी समझ में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट हुआ कि इस तरह की पहलें छात्रों को कक्षा के परे जाकर वास्तविक वैज्ञानिक अनुभव प्रदान करती हैं। प्रतिभागियों ने समुद्री पारितंत्र की जटिलताओं और संवेदनशीलता को समझते हुए संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक दृष्टि से उपयोगी सिद्ध हुआ, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवाओं में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक सार्थक कदम रहा। इस तरह की गतिविधियाँ भविष्य में समुद्री संरक्षण को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाती रहेंगी।

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