

यरूशलम : दुनिया के दिग्गज सैद्धांतिक भौतिकविदों में शुमार और 'लोढ़ा थियोरेटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' (LTPI) के फाउंडिंग डायरेक्टर प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन ने इतिहास रच दिया है। उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में दुनिया का बेहद प्रतिष्ठित 'वुल्फ प्राइज' से सम्मानित किया गया है। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने यरूशलम में आयोजित एक राजकीय समारोह में उन्हें यह पुरस्कार सौंपा।
प्रोफेसर जैन को यह सम्मान उनकी क्रांतिकारी खोज 'कंपोजिट फर्मिओन्स' के लिए दिया गया है। इस थ्योरी ने क्वांटम दुनिया को लेकर इंसानी समझ को पूरी तरह बदल दिया और फिजिक्स की सबसे कठिन पहेलियों में से एक 'फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल इफेक्ट' को सुलझाया।
क्यों इतना खास है 'वुल्फ प्राइज'?
साल 1978 से 'वुल्फ फाउंडेशन' द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार विज्ञान की दुनिया के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है। इसे नोबेल पुरस्कार के बाद दूसरा सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। इस पुरस्कार की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भौतिकी में अब तक वुल्फ प्राइज पाने वाले 27 वैज्ञानिक आगे चलकर नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं। प्रोफेसर जैन भौतिकी (Physics) में वुल्फ प्राइज पाने वाले पहले भारतीय मूल के व्यक्ति हैं, जो पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
संघर्ष से भरा प्रेरणादायक जीवन
प्रोफेसर जैन की वैज्ञानिक सफलता जितनी बड़ी है, उनका जीवन और संघर्ष उतना ही प्रेरणादायक है। राजस्थान के एक छोटे से कस्बे सांभर में पले-बढ़े जैन ने बचपन में एक भयानक हादसे का सामना किया, जिसके कारण उन्हें जीवन भर के लिए दिव्यांगता झेलनी पड़ी। भारत के मशहूर कृत्रिम पैर 'जयपुर फुट' की मदद से उन्होंने अपनी इस कमजोरी को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
उन्होंने भौतिकी के प्रति अपने जुनून को जारी रखा और महाराजा कॉलेज जयपुर से पढ़ाई के बाद आईआईटी कानपुर और स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी से डिग्रियां हासिल कीं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में एक बेहद प्रतिष्ठित शैक्षणिक करियर बनाया।
क्या थी वह खोज जिसने दुनिया को चौंकाया?
प्रोफेसर जैन ने यह क्रांतिकारी खोज साल 1989 में की थी, जब वे येल यूनिवर्सिटी में एक युवा रिसर्चर थे। उन्होंने दुनिया के सामने 'कंपोजिट फर्मिओन्स' का कॉन्सेप्ट रखा। आज यह विचार मॉडर्न कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स का मुख्य केंद्र बन चुका है और 'क्वांटम कंप्यूटिंग' जैसे भविष्य के उभरते हुए क्षेत्रों को लगातार प्रभावित कर रहा है।
प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को मिला यह सम्मान न केवल उनके असाधारण वैज्ञानिक योगदान को सलाम करता है, बल्कि यह हर उस भारतीय युवा के लिए एक जीती-जागती मिसाल है जो मुश्किल हालात से लड़कर दुनिया जीतने का ख्वाब देखता है। यह भारतीय प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और बौद्धिक श्रेष्ठता का वैश्विक मंच पर सबसे बड़ा प्रमाण है।