निष्पक्ष और समावेशी चुनाव के बिना बांग्लादेश में अस्थिरता बढ़ेगी: हसीना

भारत में निर्वासन में रह रहीं बांग्लादेश की अपदस्थ नेता शेख हसीना ने उनकी पार्टी को चुनाव से बाहर किए जाने के बाद देश में होने जा रहे आगामी चुनाव की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि निष्पक्ष और समावेशी चुनाव के बिना देश में अस्थिरता बढ़ेगी।
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फाइल फोटो
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ढाकाः भारत में निर्वासन में रह रहीं बांग्लादेश की अपदस्थ नेता शेख हसीना ने उनकी पार्टी को चुनाव से बाहर किए जाने के बाद देश में होने जा रहे आगामी चुनाव की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि निष्पक्ष और समावेशी चुनाव के बिना देश में अस्थिरता बढ़ेगी। उनके इस बयान से आम चुनाव से पहले तनाव और बढ़ सकता है।

शेख हसीना ने पिछले सप्ताह ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को भेजे एक ईमेल में आगाह करते हुए कहा कि यदि समावेशी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं हुए, तो बांग्लादेश को लंबे समय तक अस्थिरता झेलनी पड़ेगी। हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन को कुचलने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। उस कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी और उनका 15 साल का शासन भी खत्म हो गया।

यूनुस सरकार पर लगाया आरोप

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने उनकी पार्टी ‘अवामी लीग’ को चुनाव से बाहर कर उनके लाखों समर्थकों को जानबूझकर मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया। हसीना ने कहा, “जब भी देश की बड़ी आबादी को राजनीतिक भागीदारी से वंचित किया जाता है, तो इससे असंतोष बढ़ जाता है, संस्थाओं की वैधता कम होती है और भविष्य में अस्थिरता के हालात बन जाते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा, “लोगों को उनके अधिकार से वंचित कर बनी सरकार एक विभाजित देश को एकजुट नहीं कर सकती।” बांग्लादेश में 12 फरवरी के चुनाव में 12.7 करोड़ से अधिक लोग मतदान के लिए पात्र हैं। इसे दशकों में देश का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा है और यह हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहला चुनाव है।

यूनुस की अंतरिम सरकार इस प्रक्रिया की निगरानी कर रही है, जबकि मतदाता व्यापक राजनीतिक सुधारों पर प्रस्तावित संविधान संशोधन जनमत संग्रह को भी तवज्जो दे रहे हैं।

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