

कोलकाता : क्या पश्चिम बंगाल देश का अगला राज्य बनने जा रहा है, जहां समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू होगी? सूत्रों के मुताबिक, राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इसके लिए अगले सोमवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है और इसी दिन UCC से जुड़ा बिल पेश किए जाने की संभावना है।
अगर यह बिल पास होता है और लागू किया जाता है, तो पश्चिम बंगाल देश का उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नागरिक नियम लागू होंगे।
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून लागू करना है। इसके समर्थकों का कहना है कि इससे कानून में समानता आएगी, जबकि विरोधी पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखते हैं।
केंद्र सरकार भी देशभर में UCC लागू करने की दिशा में पहल करती रही है।
देश में सबसे पहले उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू की थी। 27 जनवरी 2025 से वहां UCC लागू किया गया।
उत्तराखंड के कानून में बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण, संपत्ति में बच्चों को समान अधिकार और लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों को कानूनी मान्यता जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
इसके बाद गुजरात में भी UCC लागू किया गया। वहीं असम में समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है।
संभावित UCC कानून के तहत विवाह, तलाक, संपत्ति अधिकार, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान नियम लागू किए जा सकते हैं। हालांकि पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित बिल का अंतिम स्वरूप सामने आने के बाद ही इसके प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
अब सभी की नजर सोमवार को होने वाले विधानसभा विशेष सत्र पर है, जहां यह तय होगा कि पश्चिम बंगाल UCC लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बनेगा या नहीं।