

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को अभिनेता राजपाल यादव की सजा को निलंबित रखने की मियाद एक अप्रैल तक बढ़ाते हुए कहा कि चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए जाने के संबंध में उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा क्योंकि उन्होंने ‘पर्याप्त’ भुगतान कर दिया है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने टिप्पणी की कि उच्च न्यायालय सुनवाई अदालत के फैसले के खिलाफ यादव की अपील पर सुनवाई करेगा और अंततः फैसला सुनाएगा। इसी के साथ उच्च न्यायालय ने अभिनेता के वकील को अपनी दलीलें पेश करने को कहा। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, ‘‘मैं आपकी मुख्य याचिका सुन रही हूं। मैं उन्हें अभी जेल नहीं भेज रही हूं। उन्होंने काफी बड़ी रकम का भुगतान कर दिया है। मैं इस मामले पर फैसला करूंगी।’’
अदालत ने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए यादव से कहा कि उनके पास पैसा लौटाने या मामले को चुनौती देने का विकल्प है। शिकायतकर्ता का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि सजा को निलंबित करने के आदेश के खिलाफ उनका आवेदन लंबित है।
अदालत ने रेखांकित किया कि यादव पहले ही 4.25 करोड़ रुपये जमा कर चुके हैं। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ मुझे कोई कारण नहीं दिखता। वह भाग नहीं रहे हैं...।’’ उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने कहा, ‘‘उन्होंने आपको कुछ पैसे दिए हैं। अगली तारीख को, अगर मैं तय करती हूं कि पैसे आपको मिलने चाहिए, तो मिल जाएंगे... वह अदालत में आ रहे हैं, वह जेल में रह चुके हैं। धारा 138 में आप और क्या चाहते हैं?’’ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होना एक दंडनीय अपराध है। यादव के वकील ने अदालत को सूचित किया कि उनका मुवक्किल जमा कराने के लिए 25 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) लेकर आया है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल को तय की और सजा को तब तक के लिए निलंबित रखने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय में सुनवाई यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर हुई, जिसमें दंपति ने सत्र न्यायालय के 2019 के उस फैसले को चुनौती दी है जिसने अप्रैल 2018 में चेक बाउंस मामलों में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।