

कोलकाता/गंगासागर : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वह राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान किए गए ‘‘अमानवीय’’ आचरण के खिलाफ अदालत का रुख करेंगी। सागर द्वीप में एक कार्यक्रम को संबोधित करती हुई ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने लोकतांत्रिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करते हुए, मतदाता सूचियों से मनमाने ढंग से नाम हटाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अनौपचारिक प्लेटफॉर्म सहित अपारदर्शी डिजिटल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, "यह अस्तित्व की लड़ाई है। हम कानूनी सहायता ले रहे हैं। एसआईआर के कारण बहुत से लोगों की मौत हो चुकी है। हम कल एसआईआर के कारण हुए अमानवीय व्यवहार और इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत के खिलाफ अदालत में याचिका दायर करेंगे।" उन्होंने कहा, "यदि आवश्यक हुआ तो मैं उच्चतम न्यायालय जाऊंगी और एक आम नागरिक के रूप में जनता के लिए पैरवी करूंगी। मैं जनता की ओर से बोलूंगी।" आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए प्रौद्योगिकी का ‘‘हथियार’’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि नाम हटाने के लिए मामूली वर्तनी की गलतियों, पते में बदलाव या शादी का हवाला दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जाति प्रमाण पत्र सहित वैध सरकारी दस्तावेजों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने तीन जनवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर राज्य में जारी मतदाता सूची के कथित ‘मनमाने’ और ‘त्रुटिपूर्ण’ विशेष गहन पुनरीक्षण को तुरंत रोकने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी थी कि इससे बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है तथा भारतीय लोकतंत्र की नींव को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंच सकती है। दो महीने में उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को तीसरा पत्र लिखा है।