

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्यपाल सी वी आनंद बोस द्वारा केंद्र के निर्देश के बाद राजभवन का नाम बदलकर ‘लोक -भवन’ करने के एक दिन बाद राजनीतिक दलों ने रविवार को सवाल उठाया कि आजादी के इतने साल बाद भी राज्यपाल पद कायम रखने की क्या जरूरत है। शनिवार को, राज्यपाल ने ब्रिटिश शासन के दौरान 1799 और 1803 के बीच निर्मित कोलकाता स्थित राजभवन का आधिकारिक नाम बदलकर ‘लोक-भवन’ कर दिया। विपक्षी दलों ने इस कदम के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की और कटाक्ष करते हुए कहा कि अब राज्यपालों का भी उनके भवनों के नए नाम के अनुरूप चुनाव होना चाहिए।माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने दावा किया कि नाम बदलना महज एक विज्ञापन की कवायद है। अब राजभवन को बनाए रखने का कोई तर्क नहीं है। राजभवन केंद्र सरकार की एक एजेंसी के रूप में काम करता है। यह एक सफेद हाथी को रखने जैसा है। सवाल यह है कि राज्यपाल का नाम बदलकर 'लोकपाल' क्यों नहीं कर दिया गया? नाम बदलना कुछ और नहीं, बल्कि खबरों में बने रहने की कोशिश है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि कहा कि मौलिक प्रश्न यह है कि यदि राजभवन लोकभवन है, अर्थात जनता का भवन, तो राज्यपाल राष्ट्रपति की तरह निर्वाचित क्यों नहीं होना चाहिए ? तृणमूल नेता कुणाल घोष ने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही यह फैसला क्यों लिया गया? भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि चूंकि अब राजतंत्र नहीं रहा, इसलिए राजभवन नाम जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।
लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च : राज्यपाल
राजभवन का नाम बदलने को कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा असंवैधानिक बताया और राज्यपाल को अपना फैसला वापस लेने की बात कही गयी। रविवार को इस आलोचना पर राजभवन से राज्यपाल डॉ सी वी आनंद बोस की प्रतिक्रिया आयी है। राज्यपाल ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और कोई भी राजनीतिक दल जनता से ऊपर नहीं है। इसकी पहल बंगाल से हुई जब राष्ट्रपति ने राज्यपाल के अनुरोध पर जन राजभवन की प्रतीकात्मक चाबी मुख्यमंत्री को सौंपी। बंगाल की यह पहल अब एक राष्ट्रीय आदर्श बन गई है। बंगाल के लोग इससे बहुत खुश हैं। राज्यपाल ने कहा कि राजनीति जनता की इच्छा के विरुद्ध नहीं होनी चाहिए। शनिवार को राज्यपाल ने राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन किया। राज्यपाल केंद्र के निर्देश को लागू करते हुए राजभवन का नाम बदला। राजभवन की तरफ से कहा गया है कि 25 नवंबर, 2025 को गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, देश भर के राजभवनों और राज निवासों का नाम बदलकर क्रमशः लोक भवन और लोक निवास करने का निर्णय लिया गया है। लोक भवन करने का उद्देश्य एक ऐसा भवन जो पूरी तरह जनता के लिए समर्पित करना है। राज्यपाल के मुताबिक तत्कालीन राजभवन द्वारा 'लोक राजभवन' की संकल्पना लोगों की आवश्यकताओं, उनकी आशाओं और उनकी समस्याओं और चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाने की इच्छा से प्रेरित है।