‘घूसखोर पंडत’ के निर्देशक के खिलाफ क्यों हुई लखनऊ में प्राथमिकी दर्ज?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने फिल्म ‘‘घूसखोर पंडत’’ के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ एक जाति विशेष को अपमानित करने और वैमनस्यता फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
‘घूसखोर पंडत’ के निर्देशक के खिलाफ क्यों हुई लखनऊ में प्राथमिकी दर्ज?
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लखनऊः उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने फिल्म ‘‘घूसखोर पंडत’’ के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ एक जाति विशेष को अपमानित करने और वैमनस्यता फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर दिखाई जानी है। फिल्म में अभिनेता मनोज वाजपेयी प्रमुख भूमिका में हैं।

इधर निर्माता-निर्देशक के नीरज पांडे ने फिल्म के प्रमोशन के सारे कार्य को रोक दिया है। साथ उन्होंने कहा है कि उनकी मंशा किसी जाती या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। यह फिल्म एक कैरेक्टर के संबंध में हैं।

हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) विक्रम सिंह ने बृहस्पतिवार को खुद यह प्राथमिकी दर्ज कराई। विक्रम सिंह ने शुक्रवार को पीटीआई से बातचीत में दावा किया कि यह फिल्म समाज में वैमनस्यता बढ़ाने और एक जाति विशेष को अपमानित करने का कारण बन रही है, इसलिए प्राथमिकी दर्ज करानी पड़ी। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में लेने और उनके कहने पर ही फिल्म के निर्माताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

खास जाति-समुदाय को गलत तरीके से दिखाने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, फिल्म का नाम और इसकी कहानी एक खास जाति और समुदाय, खासकर ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से दिखाती है। इससे लोगों में नाराजगी फैल सकती है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है। यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, जाति और भाषा के आधार पर वैमनस्यता को बढ़ावा देना), 299 (जानबूझकर द्वेषपूर्ण तरीके से किसी वर्ग की भावनाओं को आहत करना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 353 (सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित) और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम की धारा 66 के तहत दर्ज की गई है। यह प्राथमिकी ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म के निदेशक एवं उनकी टीम के खिलाफ दर्ज की गई है।

फिल्म को लेकर एक समुदाय में रोष

एसएचओ ने दर्ज कराई गई अपनी प्राथमिकी में कहा है कि ओटीटी मंच नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ उसके निदेशक एवं उनकी टीम द्वारा रिलीज की जा रही है। उन्होंने शिकायत की है कि इस फिल्म का नाम एक विशेष जाति को चिह्नित कर उसे अपमानित करता है जिससे उस जाति विशेष में काफी रोष व्याप्त है। प्राथमिकी के अनुसार, कई सामाजिक संगठन एवं संस्थाओं की उक्त फिल्म को लेकर उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी भी है। निदेशक द्वारा प्रसारित की गई इस फिल्म से समाज में सौहार्द एवं शांति बिगड़ने एवं समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलने की आशंका है।

नीरज पांडे ने क्या कहा

निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे ने ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर आये विरोध के स्वर के बीच एक बयान जारी किया है। उन्होंने बयान में कहा, "हमारी फिल्म एक काल्पनिक कॉप ड्रामा है, और 'पंडत' शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। कहानी एक व्यक्ति के कामों और फैसलों पर फोकस करती है और किसी जाति, धर्म या समुदाय पर कोई टिप्पणी नहीं करती या उसका प्रतिनिधित्व नहीं करती। एक फिल्ममेकर के तौर पर, मैं अपने काम को बहुत जिम्मेदारी के साथ करता हूं, ताकि ऐसी कहानियां बता सकूं जो सोच-समझकर बनाई गई हों और सम्मानजनक हों।"

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सभी प्रमोशन हटाए गए

नीरज पांडे ने आगे बताया कि टीम ने सभी प्रमोशन हटाने का फैसला किया है। इन चिंताओं को देखते हुए, हमने फिलहाल सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला किया है, क्योंकि हमारा मानना ​​है कि फिल्म को पूरी तरह से देखा जाना चाहिए और उस कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए जो हम बताना चाहते थे, न कि अधूरे हिस्सों के आधार पर जज किया जाए। हम जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म शेयर करने का इंतजार कर रहे हैं।

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