राहुल गांधी से शशि थरूर की क्यों बढ़ी दूरी?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा के लिए शुक्रवार को राज्य से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की, लेकिन सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी तथा प्रदेश के कई अन्य नेताओं के व्यवहार से नाराजगी के चलते लोकसभा सदस्य शशि थरूर इसमें शामिल नहीं हुए।
राहुल गांधी से शशि थरूर की क्यों बढ़ी दूरी?
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नई दिल्लीः कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा के लिए शुक्रवार को राज्य से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की, लेकिन सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी तथा प्रदेश के कई अन्य नेताओं के व्यवहार से नाराजगी के चलते लोकसभा सदस्य शशि थरूर इसमें शामिल नहीं हुए।

खरगे के आवास ‘10 राजाजी मार्ग’ पर हुई बैठक में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी दीपा दासमुंशी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला तथा कई अन्य नेता शामिल हुए। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य थरूर इस बैठक में शामिल नहीं हुए। थरूर के कार्यालय ने कहा है कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया था।

राहुल गांधी की अनदेखी से थरूर आहत

सूत्रों ने कहा कि राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम के मंच पर अन्य वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख किया , लेकिन चार बार के सांसद और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर का उल्लेख नहीं किया, जबकि वह मंच पर मौजूद थे। हालांकि थरूर के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया है।

हालांकि, उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वह पार्टी द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार से बहुत आहत हैं, जबकि थरूर ने खासकर आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित शिविर के मौके पर मतभेद दूर करने का प्रयास किया था। उस कार्यक्रम के बाद थरूर ने कहा था कि वह कभी भी पार्टी के रुख से अलग नहीं हटे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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पार्टी में गलत व्यवहार का इशारा

केरल कांग्रेस नेताओं द्वारा वायनाड में आयोजित उस शिविर से आगामी विधानसभा चुनावों में वाम लोकतांत्रिक मंच (एलडीएफ) का मुकाबला करने के लिए एकजुट आह्वान किया गया था। उसमें कथित तौर पर यह सहमति बनी कि थरूर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि पूरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे। हालांकि, कुछ दिनों बाद राज्य इकाई के भीतर मतभेद फिर से उभर आए हैं और थरूर हाल ही में कोच्चि में अपने साथ किए गए व्यवहार से खुश नहीं हैं।

थरूर ने पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और केरल प्रभारी दीपा दास मुंशी सहित पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों को भी संदेश भेजा है जिसमें उनके साथ हुए ‘गलत व्यवहार’ की ओर इशारा किया गया है। थरूर के बयानों और लेखों की हाल के दिनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी आलोचना की थी।

ऑपरेशन सिंदूर में पार्टी से अलग रुख रखा

पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद राजनयिक संपर्क के प्रयासों को लेकर उनकी टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से भिन्न थीं और पार्टी के कई नेताओं ने उनके इरादों पर सवाल उठाते हुए उन पर कटाक्ष किया था। हालांकि, थरूर ने कहा है कि विदेश नीति पर रुख में कोई भिन्नता नहीं है।

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