नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), दिल्ली के निदेशक बीच लगभग एक साल से रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं। एम्स से डॉक्टरों के इस्तीफों का सिलसिला पिछले दो साल से थम नहीं रहा है। इतना ही नहीं खबर है कि निदेशक और एम्स के डॉक्टरों के बीच भी काफी असंतोष है। अनेक वरिष्ठ डॉक्टर एम्स से इस्तीफा दे कर निजी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
छोड़ चुके हैं 52 डॉक्टर
पिछले दो साल में एम्स दिल्ली से 52 डॉक्टरों ने या तो समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया या फिर इस्तीफा दे दिया है। यदि एम्स के डॉक्टरों की बात मानें तो वर्तमान निदेशक डॉ एम श्रीनिवास के कार्यशैली बहुत से डॉक्टरों को पसंद नहीं है लेकिन दूसरे खेमे का कहना है कि वर्तमान निदेशक नियम कायदे कानूनों का सख्ती से पालन करते हैं इसलिए बहुत लोकप्रिय नहीं हैं।
वैसे एम्स के निदेशक और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के बीच संबंध में तनातनी का यह पहला मामला नहीं है। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया के बीच भी तत्कालीन निदेशक के संबंध अच्छे नहीं थे क्योंकि कोविड से महामारी के दौरान डॉ गुलेरिया मीडिया में मंत्री से ज्यादा छाए रहते थे। डॉ गुलेरिया समय से पहले इस्तीफा देकर पांच सितारा मेदांता अस्पताल चले गये थे।
देशभर में 400 डॉक्टर दे चुके इस्तीफा
एम्स दिल्ली ही नहीं पूरे भारत के एम्स से 2022-2024 के दौरान कुल मिला कर 400 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया। सरकार ने मानसून सत्र के दौरान संसद में इसकी पुष्टि भी की थी। एम्स ऋषिकेश , रायपुर , बिलासपुर मंगलागिरी और भोपाल से डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ कर निजी अस्पतालों को रुख कर रहे हैं। सबसे ज्यादा इस्तीफे दिल्ली एम्स से हुए हैं पचास का आंकड़ा यहां पार हो चुका है।
इस्तीफा देने वालों में ज्यादातर विभागाध्यक्ष, केंद्रों के प्रमुख और संकाय के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ शिव चौधरी, न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ शशांक, न्यूरो साइंसेंस सेंटर की डॉ पद्ममा श्रीवास्तव ,ऑर्थोपेडिक विभाग के अध्यक्ष डॉ राजेश मल्होत्रा। इनमें से ज्यादातर डॉक्टरों का कहना है कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में काम करना प्रतिष्ठा और गर्व का विषय है लेकिन जब संस्थान के हालात बहुत अच्छे न हो तो काम कैसे किया जा सकता है।
जब इस मामले पर सन्मार्ग ने पूछा कि हालात या निजी अस्पतालों में एम्स की तुलना में मिल रहा चार गुना वेतन कारण तो नहीं? पिछले साल एम्स छोड़ कर दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में काम कर रहे एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा कि ज्यादा पैसा मिलना बिल्कुल भी एम्स छोड़ने का कारण नहीं है। डॉक्टर ने कहा कि पहले एम्स में बहुत अच्छा वातावरण था निदेशक के प्रति सब बहुत सम्मान रखते थे लेकिन अब वहां विश्वास की कमी आई है।