टीएमसी पर किसका हक? EC में दोनों गुटों ने की दावेदारी

ममता गुट ने सौंपे दस्तावेज, ऋतब्रत खेमे ने मांगी मोहलत
ममता गुट की ओर से कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने चुनाव आयोग में दस्तावेज सौंपे
ममता गुट की ओर से कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने चुनाव आयोग में दस्तावेज सौंपे
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल' पर अधिकार को लेकर छिड़ी सियासी जंग अब चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच गई है। दोनों गुटों की दलीलें और दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश हो चुके हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग किसे पार्टी का वैध संगठन और चुनाव चिह्न का अधिकार देता है।

आयोग के निर्देश के अनुसार सोमवार तक दोनों पक्षों को अपने-अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज जमा करने थे। निर्धारित समय से पहले ममता बनर्जी गुट की ओर से सांसद कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने चुनाव आयोग में दस्तावेज सौंपे। दूसरी ओर, सूत्रों के अनुसार ऋतब्रत बनर्जी गुट ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अतिरिक्त दस्तावेज जमा कर कुछ और समय देने का अनुरोध किया।

दस्तावेज सौंपने के बाद कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि कानूनी और संवैधानिक रूप से तृणमूल कांग्रेस का मूल संगठन उनके पक्ष में है। उन्होंने कहा कि 1997 में चुनाव आयोग ने 'पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस' को 'जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न आवंटित किया था। बाद में वर्ष 2000 में पार्टी का नाम बदलकर 'अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' किया गया, जिसे आयोग ने भी मान्यता दी। उनके अनुसार, पार्टी का संविधान और संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह वैध है।

वहीं, ऋतब्रत बनर्जी गुट का दावा है कि 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो चुका है। ऐसे में वर्तमान संगठन की वैधता खत्म हो चुकी है और नए नेतृत्व का दावा ही कानूनन सही है। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट पहले ही चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष अपना पक्ष रख चुका है और सोमवार को अतिरिक्त दस्तावेज भी सौंप दिए गए हैं।

अब चुनाव आयोग को तय करना है कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और 'जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न पर वैध अधिकार किस गुट का होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आयोग के फैसले के बाद यह विवाद अदालत तक भी पहुंच सकता है।

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