

कोलकाता : पत्रकारों पर कथित हमले को लेकर विधानसभा में शनिवार को सियासत का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। विरोध की राजनीति के बीच वैचारिक प्रतिद्वंद्वी भाजपा और माकपा कुछ पल के लिए एक ही फ्रेम में नजर आए।
डॉ. भीमराव अंवेदकर की प्रतिमा के समक्ष काला बैज लगाकर प्रदर्शन कर रहे भाजपा विधायकों के बीच विधायक कौस्तव बागची ने अपनी शर्ट से काला बैज उतारकर माकपा विधायक मुस्ताफिजुर रहमान के सीने पर लगा दिया। बैज पहनाते हुए उन्होंने मुस्कुराकर कहा, "विरोध का हिस्सा तो बनना ही होगा।" यह दृश्य देखते ही विधानसभा परिसर में मौजूद सभी की निगाहें उसी ओर टिक गईं।
हालांकि, इसके बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया। कौस्तव बागची ने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शन के नाम पर राज्य की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, मुस्ताफिजुर रहमान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शुक्रवार के आंदोलन में आम लोगों ने स्वतःस्फूर्त रूप से भाग लिया था, जबकि कुछ ''बाहरी तत्वों'' ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
भाजपा के संसदीय कार्यमंत्री शंकर घोष ने पत्रकारों पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ ''गुंडा दमन कानून'' के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मुस्ताफिजुर ने घटना की आंशिक नैतिक जिम्मेदारी वामपंथियों की मानते हुए भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा इस कानून के इस्तेमाल का विरोध किया। उनका कहना था कि विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में ऐसे कठोर कानून का प्रयोग उचित नहीं होगा।