कोलकाता बुक फेयर में व्हीलचेयर यूजर्स के लिए अब भी मुश्किल राह

ऊबड़-खाबड़ रैंप और गलत तरीके से लगाए गए गेट बने एक्सेसिबिलिटी में बाधा
कोलकाता बुक फेयर में व्हीलचेयर यूजर्स के लिए अब भी मुश्किल राह
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : चल रहे इंटरनेशनल कोलकाता बुक फेयर में विकलांग व्यक्तियों, विशेष रूप से व्हीलचेयर पर आने वाले विजिटर्स के लिए बुक स्टॉल्स तक पहुंचना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक्सेसिबिलिटी के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत में सुविधाएं नाकाफी नजर आ रही हैं।

व्हीलचेयर यूजर्स एसोसिएशन ने किया एक्सेसिबिलिटी ऑडिट

व्हीलचेयर यूजर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने शुक्रवार को बुक फेयर परिसर का दौरा कर एक एक्सेसिबिलिटी ऑडिट किया। इस दौरान उन्होंने यह जांचने की कोशिश की कि क्या स्टॉल्स वास्तव में व्हीलचेयर-फ्रेंडली हैं या नहीं। ऑडिट में सामने आया कि लेन से स्टॉल्स तक पहुंचने के लिए बनाए गए रैंप और गेट्स व्हीलचेयर यूजर्स के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक नहीं हैं।

पिछले साल से हालात जस के तस

एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि पिछले साल भी उन्होंने इसी तरह की समस्याएं उठाई थीं, लेकिन इस बार भी कोई ठोस सुधार देखने को नहीं मिला।
व्हीलचेयर यूजर्स एसोसिएशन की सदस्य प्रियंका डे ने कहा कि "हमने पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड से बार-बार अनुरोध किया कि कोलैप्सिबल गेट इस तरह लगाए जाएं ताकि व्हीलचेयर यूजर्स बिना किसी की मदद के स्टॉल्स में प्रवेश कर सकें। लेकिन ज़्यादातर स्टॉल्स में स्थिति अब भी वैसी ही है। यह बेहद निराशाजनक है।"

ऊबड़-खाबड़ रैंप और गलत फिटिंग बनी बड़ी समस्या

कई स्टॉल्स में यह पाया गया कि जिन रेलिंग्स पर कोलैप्सिबल गेट लगाए गए थे, उन्हें प्लेटफॉर्म में ठीक से फिट नहीं किया गया था। इसके कारण व्हीलचेयर यूजर्स के लिए बिना सहायता के आगे बढ़ना लगभग असंभव हो गया। इसके अलावा, कई रैंप असमान और ऊबड़-खाबड़ थे, जिससे फिसलने और दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

गिल्ड ने मानी खामियां, सुधार का आश्वासन

पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड के अधिकारियों ने माना कि एसोसिएशन द्वारा उठाई गई कुछ समस्याएं सही हैं। एक अधिकारी ने कहा, "सभी स्टॉल्स पर रैंप बनाए गए हैं, लेकिन वे एसोसिएशन द्वारा सुझाए गए स्पेसिफिकेशन्स से पूरी तरह मेल नहीं खाते। कुछ स्टॉल्स में सुधार संभव है, लेकिन सभी में तुरंत बदलाव करना चुनौतीपूर्ण होगा। हम डेकोरेटर्स से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने को कहेंगे।"

सवाल अब भी कायम

बुक फेयर जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन में समावेशिता और समान पहुंच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या विकलांग लोगों के लिए की जाने वाली सुविधाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी, या वास्तव में ज़मीनी स्तर पर लागू होंगी।

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