

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और एडजुडिकेशन प्रक्रिया में बड़ा खुलासा हुआ है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल मिलाकर करीब 91 लाख वोटरों के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। इनमें सीधे हटाए गए नामों के साथ-साथ एडजुडिकेशन के बाद भी बाहर रह गए नाम शामिल हैं। इस व्यापक कार्रवाई को चुनाव से पहले मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की बड़ी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
कुल आंकड़ों में क्या सामने आया
रिपोर्ट के अनुसार: करीब 63.7 लाख नाम सीधे डिलीट किए गए थे। लगभग 60 लाख नाम एडजुडिकेशन में भेजे गए। इनमें से करीब 45% यानी लगभग 27 लाख नाम अंतिम रूप से बाहर रह गए। इस तरह कुल मिलाकर करीब 90.7 लाख (लगभग 91 लाख) वोटर सूची से हटे हैं।
जिलों में अलग-अलग तस्वीर
राज्य के अलग-अलग जिलों में जांच की स्थिति भिन्न रही: मालदह और मुर्शिदाबाद में सबसे अधिक मामलों की जांच हुई। उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना में भी बड़ी संख्या में नामों का सत्यापन किया गया। कोलकाता उत्तर और दक्षिण में अपेक्षाकृत कम लेकिन महत्वपूर्ण जांच दर्ज हुई।
कहां सबसे ज्यादा अयोग्य पाए गए नाम
रिपोर्ट बताती है कि कुछ जिलों में अयोग्य मतदाताओं की संख्या ज्यादा रही। नदिया, मुर्शिदाबाद और मालदह में बड़ी संख्या में नाम अयोग्य पाए गए। सीमावर्ती जिलों में भी कई नामों पर संदेह के आधार पर कार्रवाई हुई।
प्रशासन की कार्रवाई और मकसद
हर जिले में Action Taken Report तैयार की गई
-कई मामलों में नाम हटाने, सुधार और पुनः सत्यापन किया गया
-अधिकारियों के मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए की गई
चुनाव से पहले बड़ा संकेत
मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना चुनावी माहौल में बड़ा संकेत माना जा रहा है। इससे साफ है कि प्रशासन इस बार सूची की सटीकता को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता।