

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल में मतदाता दस्तावेजों की जांच को लेकर प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए आयोग के प्रतिनिधियों, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी, मुख्य सचिव और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने शनिवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अहम बैठक की। बैठक में स्क्रूटनी को न्यायिक निगरानी में कराने पर सहमति बनी।
हर विधानसभा क्षेत्र में एडीजे/डीजे नियुक्त करने का प्रस्ताव
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि 294 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एडीजे) या डिस्ट्रिक्ट जज (डीजे) की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है। उद्देश्य है कि दस्तावेजों की जांच निष्पक्ष, कानूनी और त्वरित तरीके से पूरी हो।
लाखों मतदाताओं के दस्तावेजों में गड़बड़ी, सूची सौंपेगा आयोग
शनिवार रात 12 बजे दस्तावेज अपलोड का पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी या मिसमैच के कारण अपलोड न हो सके दस्तावेजों की सूची मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जाएगी। अनुमान है कि करीब 45 लाख मतदाताओं के दस्तावेज जन्मतिथि, आधार विवरण, नाम या पारिवारिक जानकारी में असंगति के कारण लंबित हैं। ऐसे मामलों को न्यायिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण, सोमवार से शुरू होगी जांच
मुख्य न्यायाधीश ने अन्य न्यायिक अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर प्रक्रिया को स्पष्ट किया। चुनाव आयोग की लीगल सेल द्वारा एडीजे और डीजे को दस्तावेज स्क्रूटनी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को लॉगिन आईडी भी जारी कर दी गई है। प्रस्ताव है कि सोमवार से न्यायिक स्क्रूटनी औपचारिक रूप से शुरू हो जाए। अब किसी भी मतदाता के दस्तावेज पर अंतिम निर्णय केवल न्यायिक अधिकारी ही ले सकेंगे।
स्क्रूटनी केंद्रों पर सीसीटीवी से निगरानी
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी स्क्रूटनी केंद्रों के भीतर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
28 फरवरी को जारी होगी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट
मनोज अग्रवाल के अनुसार, 28 फरवरी तक जिन मतदाताओं के दस्तावेज सत्यापित होकर अपलोड हो जाएंगे, उनके नाम अंतिम सूची में शामिल कर लिए जाएंगे। उसी दिन सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की जाएगी, जिसमें छह करोड़ से अधिक नाम प्रकाशित होने की संभावना है। आवश्यकता पड़ने पर इसी सूची के आधार पर मतदान कराने की भी व्यवस्था की जा सकती है।