

कोलकाता : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में पश्चिम बंगाल के शहरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। तीन आबादी श्रेणियों में जारी रैंकिंग में हल्दिया ने देश के शीर्ष 10 शहरों में जगह बनाकर राज्य का मान बढ़ाया, जबकि बड़े शहरों की श्रेणी में कोलकाता और हावड़ा पिछड़े रहे। राष्ट्रीय स्तर पर 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया।
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे तथा भोपाल और आगरा संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। सूरत पांचवें स्थान पर रहा। ठाणे, नवी मुंबई, अहमदाबाद और नागपुर ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए ऊंची रैंकिंग हासिल की। दिल्ली 21वें स्थान पर रही।
इसी श्रेणी में पश्चिम बंगाल का सबसे बेहतर प्रदर्शन आसनसोल का रहा, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर 20वां स्थान मिला। कोलकाता 38वें और हावड़ा 39वें स्थान पर रहे। तीन लाख से 10 लाख आबादी वाले शहरों में दुर्गापुर 37वें स्थान पर रहा।
वहीं, तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में हल्दिया ने नौवां स्थान हासिल कर राज्य के सभी शहरों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस तरह पश्चिम बंगाल के शहरों में राष्ट्रीय रैंकिंग के लिहाज से हल्दिया सबसे आगे रहा।
कोलकाता की रैंकिंग कमजोर रहने के बावजूद वायु प्रदूषण घटाने के प्रयासों में कुछ सुधार दर्ज हुआ है। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 के मुकाबले शहर में PM10 स्तर में करीब 37 प्रतिशत की कमी आई है। यह मुंबई के बाद महानगरों में दूसरा बड़ा सुधार है। हालांकि, कोलकाता का वार्षिक औसत PM10 स्तर अब भी राष्ट्रीय मानकों से ऊपर है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों का मूल्यांकन वायु गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना, वाहन उत्सर्जन नियंत्रण, सड़क एवं निर्माण से उड़ने वाली धूल, ठोस कचरा प्रबंधन और जन-जागरूकता जैसे मानकों पर किया जाता है। रैंकिंग से संकेत मिलता है कि छोटे शहरों में हल्दिया ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जबकि कोलकाता-हावड़ा जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती बरकरार है।