

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल सहित देश के 12 राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया तेजी से जारी है। इस बार 9 दिसंबर को जब ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होगी, तो उसके साथ पहली बार एक अलग “कारण सूची” भी जारी की जाएगी। इस सूची में उन लोगों के नाम शामिल होंगे, जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं। इसमें यह भी बताया जाएगा कि उनके नाम क्यों हटाये गये या शामिल नहीं किये गये। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने यह नयी व्यवस्था लागू की है, जिसे पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
6.87 करोड़ से अधिक गणना फॉर्म बांटे जा चुके
पश्चिम बंगाल में SIR का काम तेजी से हो रहा है। राज्य में बुधवार शाम 4 बजे तक 6.87 करोड़ से अधिक गणना फॉर्म घर-घर जाकर बांटे जा चुके हैं। इन फॉर्मों को भरने और जमा करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर रखी गयी है। इसके बाद 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। वर्तमान में राज्य में 7,65,37,529 मतदाता पंजीकृत हैं। आयोग ने 7,64,45,503 एनुमरेशन फॉर्म छपवाए थे, जिनमें से 6,80,52,601 (88.8%) फॉर्म वितरित हो चुके हैं। इस प्रक्रिया में 80,681 बीएलओ (Booth Level Officers) और 18,114 बीएलए (Booth Level Agents) की नियुक्ति की गयी है।
ड्राफ्ट सूची के साथ पहली बार ‘कारण सूची’ भी
इस बार सिर्फ ड्राफ्ट मतदाता सूची ही नहीं, बल्कि उसके साथ एक अलग सूची भी प्रदर्शित की जाएगी। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार हो रहा है। इस “कारण सूची” में उन लोगों के नाम होंगे जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रह गये हैं, साथ ही नाम न होने का कारण भी दर्ज किया जाएगा।
फॉर्म जमा नहीं करने वालों के नाम अलग सूची में
2025 की मतदाता सूची में जिनके नाम हैं, उन्हें गणना फॉर्म दिया गया है। जिन्होंने फॉर्म जमा किया, उनके नाम ड्राफ्ट सूची में रहेंगे, जबकि जिन्होंने फॉर्म जमा नहीं किया, उनके नाम “कारण सूची” में दिखेंगे और उन्हें सूची से हटा दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पारदर्शी प्रक्रिया
बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान हुई गड़बड़ियों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को आदेश दिया था कि वह नाम छूटने का कारण बताने वाली सूची भी जारी करे। अब यही नियम बंगाल सहित अन्य राज्यों में भी लागू किया जा रहा है।
2026 की मतदाता सूची होगी अधिक पारदर्शी
आयोग का दावा है कि इस प्रक्रिया से मृत, फर्जी या दूसरी जगह स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान स्पष्ट होगी। 9 दिसंबर को दोनों सूचियाँ जारी होने के बाद यह तय हो जाएगा कि 2026 की अंतिम मतदाता सूची से कितने नाम बाहर रहेंगे। चुनाव आयोग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाएगा।