LPG संकट के बीच सरकार की Induction Heaters का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

पश्चिम एशिया संकट के कारण एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच इंडक्शन हीटर व उससे जुड़े बर्तनों की बढ़ती मांग बढ़ गई है।
इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों की मांग बढ़ी ( फाइल फोटो )।
इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों की मांग बढ़ी ( फाइल फोटो )।
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नई दिल्लीः सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच इंडक्शन हीटर व उससे जुड़े बर्तनों की बढ़ती मांग के मद्देनजर कंपनियों को इन उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के तरीकों पर शुक्रवार को चर्चा की। इस संकट ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही को बाधित कर दिया है। इससे खाना पकाने की गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और लोग इंडक्शन हीटर और उसके अनुकूल बर्तन खरीद रहे हैं।

बैठक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई। इसमें ऊर्जा सचिव, विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ हमने चर्चा की कि इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों (जैसे इंडक्शन कुकर के बर्तन) का उत्पादन किस तरह तेजी से बढ़ाया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा कि इन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और बाजार में ये तेजी से बिक रहे हैं।

इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों की मांग बढ़ी ( फाइल फोटो )।
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उद्योग जगत के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण खाना पकाने की गैस की आपूर्ति संबंधी चिंताओं के मद्देनजर इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक केतली की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है। अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए, सरकार ने बृहस्पतिवार को महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात को 30 जून तक तीन महीने के लिए सीमा शुल्क से छूट दी। इससे दवा, रसायन और वस्त्र जैसे क्षेत्रों को राहत मिली तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच आपूर्ति स्थिरता सुनिश्चित हुई। हालांकि इस कदम से सरकारी खजाने पर 1800 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान जहाज मार्गों में व्यवधान से उर्वरक, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत उर्वरक और पेट्रोलियम का एक प्रमुख आयातक देश है। अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने और तेहरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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