

कोलकाता : राज्य की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का खाका पेश करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, सरकारी स्कूलों का आधुनिकीकरण करना और निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाना है। उन्होंने दो टूक कहा, "शिक्षा को किसी भी कीमत पर व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा।"
शिक्षक नियुक्ति, विद्यालयों के बुनियादी ढांचे पर चर्चा
मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार शुभेंदु अधिकारी विकास भवन पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजुमदार, स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन, उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग के चेयरमैन दुष्यंत नारियाला तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में शिक्षक नियुक्ति, विद्यालयों के बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मिड-डे मील योजना सहित शिक्षा विभाग के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
1 अगस्त से इस्कॉन संभालेगा मिड-डे मील की जिम्मेदारी
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मील पर प्रति छात्र प्रतिदिन खर्च 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये किया जा रहा है। आगामी 1 अगस्त से कोलकाता समेत राज्य के बड़े हिस्से में मिड-डे मील तैयार करने और वितरण की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपी जाएगी। संस्था भी इस योजना में आर्थिक सहयोग करेगी, जिससे विद्यार्थियों को अधिक पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
12 हजार रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू
उन्होंने बताया कि अगले एक सप्ताह के भीतर प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए नई रूपरेखा तैयार की जाएगी। सरकार ने संकेत दिया कि विभिन्न स्तरों पर करीब 12 हजार रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नियुक्तियां पूरी पारदर्शिता, मेरिट और आरक्षण रोस्टर के अनुसार की जाएंगी।
विधानसभा में आएगा नया शिक्षा विधेयक
निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी। सरकार सभी संस्थानों के एनओसी और फीस संरचना की जांच करेगी। नियमों का पालन नहीं करने अथवा अत्यधिक फीस वसूलने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी के साथ आगामी विधानसभा सत्र में नया शिक्षा विधेयक लाया जाएगा, जिसके तहत स्कूल प्रबंधन समितियों में अभिभावकों को प्रमुख भूमिका देने का प्रस्ताव है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होगी राज्य की शिक्षा व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि तीन वर्षों से लंबित कंपोजिट ग्रांट राज्य के 81 हजार सरकारी विद्यालयों को जारी की जाएगी। चरणबद्ध तरीके से सभी स्कूलों में सोलर पैनल, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, वाटर प्यूरीफायर, पंखे तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए सरकार तेजी से कदम उठा रही है।