

कोलकाता : विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के तबादले का रास्ता खोलने वाले राज्य सरकार के प्रस्तावित संशोधन विधेयक ने उच्च शिक्षा जगत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोमवार को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब गुरुवार को विधानसभा के विशेष अधिवेशन में विधेयक पेश करने की तैयारी है। इसके साथ ही सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच टकराव के आसार बढ़ गये हैं।
विधेयक के खिलाफ रणनीति तय करने के लिए पश्चिम बंगाल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय शिक्षक समिति (वेबकुटा) ने बुधवार को आपात बैठक बुलायी है। संगठन के अध्यक्ष प्रो. शुभोदय दासगुप्ता ने कहा कि सरकार के फैसले से शिक्षक समुदाय निराश है। उनके मुताबिक, 2017 में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की कोशिश हुई थी, जिसके खिलाफ वेबकुटा अदालत पहुंचा था और मामला अब तक लंबित है।
दासगुप्ता ने आरोप लगाया कि नया विधेयक उच्च शिक्षण संस्थानों में सरकारी एकाधिकार और स्वेच्छाचारिता को बढ़ावा दे सकता है। उनका कहना है कि विधेयक कानून बनता है तो उसके खिलाफ सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय की जायेगी।
इधर, शिक्षाविदों के एक वर्ग के अदालत जाने की तैयारी से सवाल और गंभीर हो गया है—तबादले की प्रशासनिक व्यवस्था के पीछे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कितनी सुरक्षित रहेगी?