

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा है कि अब तक करीब 60 लाख ‘अंडर एडजुडिकेशन’ वोटर्स में से 7.5 लाख नामों की स्क्रूटनी पूरी हो चुकी है। आयोग ने डेडलॉक को जल्दी खत्म करने के लिए ओडिशा और झारखंड से 200 और ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को राज्य में तैनात करने का फैसला किया है, जिनके शनिवार तक पहुंचने की उम्मीद है।
अंडर एडजुडिकेशन नामों को सुलझाने की तेज कोशिश
एडमिनिस्ट्रेटिव सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार शाम 5 बजे तक करीब 7.5 लाख नामों का एडजुडिकेशन हो चुका है। हालांकि आयोग ने साफ किया है कि एडजुडिकेशन का मतलब यह नहीं है कि सभी नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो जाएंगे। केवल उन्हीं लोगों के नाम अंतिम सूची में रखे जाएंगे जिनके दावे और दस्तावेज सत्यापन में सही पाए जाएंगे।
200 और ज्यूडिशियल ऑफिसर बुलाए गए
फिलहाल राज्य में करीब 505 ज्यूडिशियल ऑफिसर इस प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं। लेकिन मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए आयोग ने ओडिशा और झारखंड से 100-100, कुल 200 अतिरिक्त ऑफिसर बुलाने का निर्णय लिया है। आयोग का लक्ष्य है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले अधिकतम मामलों का निपटारा कर लिया जाए।
इन जिलों पर विशेष फोकस
नए आने वाले ज्यूडिशियल ऑफिसरों को मुख्य रूप से दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में तैनात किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- नॉर्थ 24 परगना
- साउथ 24 परगना
- ईस्ट बर्दवान
- वेस्ट बर्दवान
- हावड़ा
- हुगली
-बीरभूम
-नादिया
इन जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं जिनके नाम अभी अंतिम रूप से तय नहीं हो पाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही प्रक्रिया
आयोग के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया Supreme Court of India के निर्देशों के तहत चल रही है। ज्यूडिशियल ऑफिसर दस्तावेजों की अंतिम जांच कर रहे हैं और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मामलों को डिस्पोज किया जाएगा। अभी तक ‘एडजुडिकेटेड’ श्रेणी में लगभग 60 लाख 6 हजार 675 नाम है।
विपक्ष और सरकार आमने-सामने
इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष का कहना है कि जब तक इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए। दूसरी ओर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR प्रक्रिया के खिलाफ शुक्रवार दोपहर से धरना शुरू किया है। वहीं वामपंथी दलों के नेता भी CEO कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर चुके हैं।